2,500 साल पुरानी संस्कृत की पहेली को नहीं सुलझाया पाया था कोई, 27 साल के भारतीय लड़के ने किया हल

Panini Sanskrit Puzzle: भारतीय नागरिक बहुत ही बुद्धिमान और प्रतिभाषाली होते हैं, जो अपने टैलेंट के दम पर दुनिया की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों में कार्यरत हैं या फिर उन्हें चला रहे हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि भारतीय सिर्फ बिजनेस कर सकते हैं, बल्कि वह प्राचीन संस्कृति और भाषा को समझने की काबिलियत भी बखूबी जानते हैं।

ऐसे में हाल ही में संस्कृत के विद्वान पाणिनी (Sanskrit scholar Panini) द्वारा लिखे हुए एक व्याकरण की पहेली को नौजवान भारतीय ने हल कर दिया है, जिसे 5वीं शताब्दी के बाद से कोई हल नहीं कर पाया था। इस पहेली को अष्टाध्यायी के नाम से जाना जाता है, जिसके एक पाठ में खास तरह की व्याकरण पहेली है। इस पहेली को जैसे ही कोई व्यक्ति हल करता था, उसका जवाब हमेशा गलत होता था।

PHD स्टूडेंट ने हल की संस्कृत की प्राचीन पहेली (Panini Sanskrit Puzzle)

इस प्राचीन पहेली को सुलझाने का काम 27 वर्षीय ऋषि अतुल राजपोपत (Rishi Atul Rajpopat) ने किया है, जो कैम्ब्रिज में स्थित सेंट जॉन्स कॉलेज में एशियन एंड मिलड ईस्टर्न विभाग में पीएचडी की पढ़ाई कर रहे हैं। संस्कृत विद्वान पाणिनी ने आज से तकरीबन ढाई हजार साल पहले इस पाठ को लिखा था, जिसमें एक मेटारूल दिया था।

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यह मेटारूल अन्य विद्वानों के लिए व्याकर की पहेली बन गया था, क्योंकि जब भी कोई विद्वान उस मेटारूल को फ्लो करता था तो उसका जवाब हमेशा गलत आता था। ऐसे में विद्वान यह जानना चाहते थे कि आखिर व्याकरण की इस पहेली को कैसे सुलझाया जाए, ताकि इस मेटारूल को फ्लो करते हुए सही जवाब मिल जाए।

ऐसे में भारतीय मूल के ऋषि अतुल ने इस ढाई हजार साल पुरानी पहेली को सुलझाने का फैसला किया, जिसमें उन्हें 2.5 साल का लंबा वक्त लग गया। ऋषि अतुल ने इस पहेली पर काम करते हुए इसके सभी अपवादों को दूर कर दिया, जिसकी वजह से सालों पुरानी व्याकरण की पहेली सुलझ गई।

ऋषि अतुल का कहना है कि यह पहेली काफी मुश्किल है, जिससे तंग आकर वह उसे बीच में ही छोड़ना चाहते थे। लेकिन अतुल को जल्द ही एहसास हो गया है कि उनकी इतने लंबे समय की मेहनत खराब हो जाएगी, लिहाजा उन्होंने साइकिल चलाकर और घूमकर अपना शांत किया और फिर इस उलझाऊ पहेली को सुलझाने में सफलता प्राप्त कर ली।

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