गोबर से भी हो सकती है लाखों की आमदनी, इन दो युवाओं ने कर दिखाया है ये काम

यूपी; गोबर के काम से तो हम सभी दूर ही रहना पंसद करते हैं। पुराने ज़माने के लोगों को छोड़ दें तो आज गोबर उठाना कोई शायद ही पंसद करे। गोबर के बीच काम करने वाले लोगों को हम कभी सम्मान की नज़र से नहीं देखते। लेकिन आज हम जो कहानी आपको बताने जा रहे हैं वह आपको हैरान कर देगी। आप सोच में पड़ जाएंगे कि भला जिस गोबर को देख कर आप मुंह चिढ़ाते थे, वह इतना भी कीमती हो सकता है। आइए जनते हैं क्या है गोबर से लाखों रूपये की आमदनी करने वाले इन युवाओं की कहानी।

गोबर को सोने जैसा कीमती बनाने वाले इन दोनों युवाओं का नाम चंद्रमौली पांडेय (Chandramouli Pandey) और मुकेश पांडेय (Mukesh Pandey) है। ये युवा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के सीखड़ गाँव में रहते हैं। मुकेश पांडेय रूरल डेवलपमेंट से पोस्ट ग्रेजुएट होने के साथ ईडीआई बिजनेस स्कूल, अहमदाबाद से एमबीए पास हैं। मुकेश ने सात सालों तक पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी भी की। लेकिन विचार हमेशा से कुछ अलग करने का रहा था। वह जब भी अपने गाँव सीखड़ आते तो देखते कि वहाँ हर तरफ़ गोबर से गंदगी बिखरी हुई है। गलियाँ गोबर से अटी पड़ी होती थी।

तब आया वर्मी कम्पोस्ट खाद (Vermicompost) बनाने का विचार

मुकेश ने देखा कि गाँव में जिन घरों में मिट्टी का चूल्हा है वह तो गोबर से उपले बनाकर उसका प्रयोग चूल्हे में कर लेते हैं। कुछ लोग गोबर की खाद का खेतों में प्रयोग कर लेते हैं। लेकिन इन सबके बाद भी जानवारों का गोबर बच ही जाता था। क्योंकि गाँव में हर घर में कई जानवर होते थे। इसलिए गाँव की गलियों में, सड़कों के किनारे गोबर पड़ा बजबजाता रहता था। बारिश में मौसम में तो ये हालत और बुरी हो जाती थी।

इन सब को देखने के बाद मुकेश को विचार आया कि क्यों ना इस बेकार पड़े गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद बना दी जाए। वर्मी कम्पोस्ट खाद बेहद गुणवत्ता वाली होती है, जो कि खेतों में काम आती है। लेकिन नौकरी करने वाले मुकेश के लिए ये इतना आसान नहीं था। पर बिना ज़्यादा सोचे समझे उन्होंने इसकी शुरूआत कर ही दी।

1500 रूपये में खरीदते हैं गोबर

चंद्रमौली बताते हैं कि वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए अब लोगों से वह गोबर खरीदते हैं जिसकी क़ीमत वह उनको 1500 रूपये ट्राली देते हैं। इस क़ीमत को देखकर गाँव के लोग जो पहले सड़कों पर या खेत में गोबर को फैंक दिया करते थे। वह भी चंद्रमौली के साथ जुड़ गए। अब वह अपने घर के गोबर को इकठ्ठा करने लगे। गोबर बेचने के लिए अब पशुपालक भी इकठ्ठा करने गोबर लगे। इस गोबर से उनकी अच्छी आमदनी होने लगी। ऐसे में मुकेश के पास गोबर का ढेर लग गया।

दूसरे राज्यों से भी आई मांग

वर्मी कम्पोस्ट खाद का काम केवल अब केवल मुकेश के गाँव या जिले तक ही सीमित नहीं है। मुकेश की इस खाद की मांग अब दूसरे राज्यों से भी आ रही है। मुकेश बताते हैं कि नाबार्ड और कृषि विभाग की मदद से शुरू किया गया उनका ये छोटा-सा काम आज तरक्क़ी कर गया है। आज उनकी बनाई खाद की मांग दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान तक फैल गई है। इससे पता लगता है कि उनका काम अब कितना विस्तार पकड़ चुका है। आने वाले दिनों में ये मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

केंचुआ पालन का काम भी किया शुरू

मुकेश बताते हैं कि अब उनकी बनाई खाद की मांग विदेशों से भी आने लगी है। जिसके चलते जल्द ही उनकी खाद का निर्यात विदेशों में भी शुरू कर दिया जाएगा। चंद्रमौली और मुकेश अब खाद बनाने के काम के साथ-साथ केंचुआ पालन का काम भी शुरू कर चुके हैं। जिससे उन्हें हर साल पांच लाख की आमदनी हो रही है। वह अब लोगों को केंचुआ भी बेचने लगे हैं। केंचुआ पालन की शुरूआत उन्होंने 40 हज़ार के आस्ट्रेलियन प्रजाति के केंचुए खरीद कर शुरू किया था। जो कि अब ज़ोर पकड़ रहा है। आपको बता दें कि केंचुआ किसान का मित्र कहा जाता है। जो कि मिट्टी में रहकर उसे भुरभुरी करने का काम करता है।

सालाना 28 लाख की आमदनी

मुकेश बताते हैं कि एक किलो वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने में लगभग तीन रुपए की लागत आती है। इसके बाद वह उसी खाद को दस रूपये  प्रति किलो में बेचते हैं। इसके लिए उन्होंने दो, पांच, दस और पचास किलो के पैकेट तैयार किए हैं। जो कि सीधा किसानों और बाज़ार में दुकानदारों को बेच देते हैं। इस खाद की मांग नर्सरी में भी की जाने लगी है। हैं। मिर्ज़ापुर के उप कृषि निदेशक अशोक उपाध्याय (Ashok Upadhyay) ने बताया कि इस योजना कि शुरूआत किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए की गई है। वह लगातार सररकार की तरफ़ से आने वाली मदद से इस योजना को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

वीडियो में देखें, गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने की पूरी प्रक्रिया

बना दी नजीर

मुकेश ने जिस तरह से बेकार समझे जानें वाले गोबर को प्रयोग में लाया वह काबिले तारीफ है। इस काम से देश में स्वच्छता को तो बढ़ावा मिलेगा ही। साथ ही लोगों को प्रेरणा भी मिलेगी कि किस तरह से गंदगी से भी आमदनी की जा सकती है। उनके इस काम को ‘AWESOME GYAN‘ सलाम करता है।