Pearl Farming : कोरोना में छूट गई स्कूल के टीचर की नौकरी, अब मोती की खेती करके सालाना कमा रहे हैं 2 लाख रुपए

Raza Mohammed Pearl Farming : विश्व भर में कोरोना की वजह से कई लोगों की जान चली गई थी, जबकि दर्जनों लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। ऐसे में नौकरी छूट जाने के बाद अपने परिवार का पालन करने लोगों ने छोटे मोटे काम करना शुरू कर दिया था, जिसकी वजह से उन्हें आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा।

लेकिन जब अजमेर के रहने वाले स्कूल टीचर रजा मोहम्मद की जब नौकरी छूटी, तो उन्होंने निराश होने के बजाय कमाई का एक नया जरिया तलाश कर लिया था। रजा मोहम्मद (Raza Mohammed) ने घर पर मोती की खेती (Pearl Farming) करना शुरू कर दिया था, जिसकी बदौलत आज वह लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं।

Pearl Farmer Raza Mohammed

टीचर ने शुरू की मोती की खेती

राजस्थान (Rajasthan) के अजमेर (Ajmer) जिले में स्थित रसूलपुरा गाँव (Rasoolpura Village) में रजा मोहम्मद (Raza Mohammed) नामक 41 वर्षीय टीचर रहते हैं, जिनकी नौकरी कोरोना काल के दौरान छूट गई थी। ऐसे में रजा मोहम्मद ने कमाई का नया जरिया तलाश करने के लिए मोती की खेती (Pearl Farming) करना शुरू कर दिया था, जिसके लिए उन्होंने नरेंद्र कुमार गरवा की मदद ली थी।

नरेंद्र कुमार गरवा राजस्थान में लंबे समय से मोती की खेती कर रहे हैं, जबकि वह अन्य किसानों को भी इस फसल को तैयार करने का हुनर सिखाते हैं। ऐसे में रजा मोहम्मद ने नरेंद्र कुमार से मोती की खेती करना सीख लिया, जिसके बाद उन्होंने 60 से 70 हजार रुपए निवेश किए।

इसके लिए रजा ने अपने खेत में 10 बाय 25 का एक छोटा-सा तालाब बनाया था, जिसमें उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों के खरीदे गए 1 हजार सीप (बीज) डाल दिए थे। रजा दिन रात तालाब और सीप की देखभाल करते थे, जबकि नियमित रूप से पानी के पीएच और अमोनिया लेवल की जांच भी करते हैं।

Raza Mohammed Pearl Farmer

सालाना 2 से 3 लाख रुपए कमा रहे हैं रजा

इस तरह रजा मोहम्मद की मेहनत रंग लाई और उन्होंने एक सीप में कम से कम 2 मोती प्राप्त किए, जिसकी वजह से उन्हें पहले ही प्रयास में अच्छी सफलता मिली थी। हालांकि रजा का कहना है कि मोती की खेती करते वक्त 20 से 25 प्रतिशत सीप खराब भी हो जाते हैं, लेकिन अगर दूसरे सीप में ज्यादा मोती निकल आए तो इससे नुकसान की भरपाई हो जाती है।

बाजार में एक मोती की कीमत 200 से 1 हजार रुपए की बीच होती है, जिसकी वजह से बड़े इलाके में मोती की खेती करने वाले किसानों का काफी ज्यादा फायदा होता है। रजा मोहम्मद छोटी-सी जगह पर तालाब बनाकर मोती की खेती करते हैं, जिससे उन्हें सालाना 2 से 3 लाख रुपए की कमाई हो जाती है।

रजा मोहम्मद का कहना है कि पारंपरिक खेती की जगह पर तकनीक खेती में प्रयोग करना काफी फायदेमंद साबित होता है, जिसकी वजह से मुझे अपने फैसले पर गर्व है। आज पूरे इलाके में लोग मुझे मोती की खेती के लिए जानते हैं, जो मुझे एक सफल किसान बनाने वाली बात है।

इसके अलावा मोती की खेती करने के लिए ट्रेनिंग लेना बहुत ही अनिवार्य है, क्योंकि इससे खेती से जुड़ी छोटी बड़ी अहम बातें पता चलती हैं। रजा मोहम्मद ने नरेंद्र कुमार से ट्रेनिंग दी थी, जिन्होंने यह बताया था कि मोती की खेती के लिए तालाब और मीठे पानी की जरूरत होती है।

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