‘ताइवानी पिंक अमरूद’ को उगाकर कमा रहे हैं 30 लाख रुपये सलाना, 6 महीने में तैयार होता है फसल

मध्यप्रदेश: यदि हम आपसे कहें कि आप खेती क्यों नहीं करते? तो आपका जवाब यकीनन यही होगा कि खेती से भला क्या होगा। खेती से कौन-सा मोटा फायदा होने वाला है। लेकिन इस मानसिकता को छोड़ जिन लोगों ने खेती की तरफ़ अपना क़दम बढ़ाया है वह गहरे मुनाफे में आज गोता लगा रहे है। ये बात हवा-हवाई नहीं है। देश का ही एक पढ़ा-लिखा किसान इसे सार्थक करके दिखा रहा है।

ये किसान आज ‘ताइवानी अमरूद’ की खेती (Taiwan Guava Farming) देश की ज़मीन पर कर रहा है। सुनकर भले ही अजीब लगा हो, पर ये किसान विदेशी अमरूद की क़िस्म देश की ज़मीन पर उगा रहा है और लाखों की आमदनी भी कर रहा है। आइए जानते हैं कौन है ये किसान और कैसै विदेशी क़िस्म को उगा रहा है देश की ज़मीन पर।

जितेन्द्र पाटीदार (Successful Farmer Jitendra Patidar)

इस किसान का नाम जितेन्द्र पाटीदार (Successful Farmer Jitendra Patidar) है। ये मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक छोटे से जिले मंदसौर (Mandsaur) में रहते हैं। आज ये अपने जिले से हटकर ताइवानी अमरूद की खेती कर रहे हैं और आधुनिक ढंग से अमरूद की खेती कर रहे हैं। जिससे लाखों की आमदनी के साथ मिसाल भी क़ायम कर रहे हैं।

उगाते हैं ताइवानी अमरूद Taiwan Guava Cultivating

किसान जितेन्द्र बताते हैं कि वह पहले मंदसौर जिले में ही किसी दूसरे क़िस्म के अमरूद की खेती किया करते थे। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि एक ‘ताइवानी अमरूद’ की क़िस्म होती है। जिसे उगाकर लाखों रुपए कमाए जा सकते हैं। इसके बाद उन्होंने बैंगलोर, हैदराबाद, कोलकाता जैसे बड़े महानगरों में इस पर रिसर्च की। ताकि इसके बारे में अच्छे से जानकारी जुटाई जा सके। पूरी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने ताइवान पिंक अमरूद (Taiwan Pink Guava) के पौधे खरीदे। पिछले दो साल से वह 15 एकड़ ज़मीन पर इसकी खेती कर रहे हैं।

वीडियो में देखें कैसे होती है ताइवानी अमरूद खेती

6 महीने पहले ऑर्डर करने पड़ते हैं पौधे

किसान जितेन्द्र बताते हैं कि इस क़िस्म के पौधों को बैंगलोर (Bangalore) शहर में टिशू कल्चर (Tissue culture) विधि से तैयार किया जाता है। जिसके चलते उन्हें पौधों का आर्डर लगभग छह महीने पहले ही देना पड़ता है। इस समय वह हर साल लगभग 40 हज़ार पौधे मंगवाते हैं जिसकी क़ीमत एक से डेढ लाख रुपए तक होती है। इन पौधे को लगाने के बाद बाज़ार में बेचकर इनसे कई गुना मुनाफा कमाया जा सकता है। किसान जितेन्द्र फिलहाल इस तरह की खेती के लिए दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं।

भारी मात्रा में देते हैं फल

किसान जितेन्द्र आज इस अमरूद की खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। वह बताते हैं कि एक अमरूद के पौधे को फल देने में 6 महीने से लेकर 1 साल तक का समय लग जाता है। इन अमरूदों को पहले साल लगाने पर एक एकड़ ज़मीन पर 8-10 टन का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद हर साल अकेला एक पौधा ही 8 से 10 किलो अमरूद का उत्पादन करने लगता है। जिससे एक एकड़ में ही 25 टन अमरूद उगाए जाते हैं।

कब करें बुवाई

इस तरह के अमरूद को भी अपने खेत में बेहद आसानी से बोया जा सकता है। इस अमरूद के लिए भी बेहद साधारण जलवायु चाहिए होती है। इस तरह के अमरूद को उगाने के लिए पहले खेत की जुताई कर लें। इसके बाद खेत में लंबी-लंबी नालियाँ बनानी होती हैं। नाली बनाने में ध्यान रखें कि एक नाली से दूसरी नाली की दूरी नौ फीट ज़रूर हो। साथ ही पौधे को भी एक दूसरे से पांच फीट की दूरी पर ही लगाएँ। सब कुछ करने के बाद पौधे को ज़मीन में अच्छी गहराई में दबाकर लगा दें। साथ ही पानी भी दे दें। इस पौधे की बुआई का सही समय जुलाई से अगस्त माह के बीच होता है। ताकि बारिश के मौसम में जल्दी बड़ा हो जाए।

ताइवानी अमरूद की ये हैं खूबियाँ –

  1. इस फल तोड़ने के आठ दिनों तक खराब नहीं होता, इसलिए ट्रांसपोर्ट (Transport) में आसानी रहती है।
  2. दूसरे पेड़ों के मुकाबले इसमें फल मात्र 6 महीने बाद ही आने शुरू हो जाते हैं।
  3. ये अमरूद अंदर से हल्के गुलाबी रंग का होता है, साथ ही दूसरे अमरूद के मुकाबले ज़्यादा स्वाददार होता है।
  4. इसके फल का वज़न 300 से 800 किलोग्राम तक चला जाता है, जिससे आमदनी अच्छी हो जाती है।
  5. इसमें लगातार फल लगते रहते हैं, ऐसे में किसी विशेष मौसम में फल ना लगने या खराब हो जाने से कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता।

कई राज्यों में है मांग

किसान जितेन्द्र बताते हैं कि इससे अच्छी आमदनी हो जाती है। आज इस क़िस्म के अमरूद की मांग दिल्ली (Delhi) , यूपी (UP) हरियाणा (Haryana) समेत कई राज्यों में है। इसलिए बहुत से किसान उनसे इसके बीज भी खरीद कर ले जाते हैं। साथ ही ये अमरूद थोक के भाव में भी 40 रुपए किलो तक बिक जाते हैं।

साथ उगाई जा सकती हैं दूसरी फसलें भी

अमरूद की खेती के साथ दूसरी फसलें भी बेहद आसानी से उगाई जा सकती हैं। किसान जितेन्द्र फिलहाल अमरूद के साथ ही प्याज, हल्दी, अश्वगंधा, पपीता से भी अच्छी आमदनी कर रहे हैं। इनको मिलाकर पिछले साल कुल उन्होंने 30-35 लाख की आमदनी की थी। वहीं इस साल उनका लक्ष्य आमदनी को 40 लाख तक पहुँचाना है।