इस शख़्स ने बैंक की जॉब छोड़कर शुरू की खेती, अब प्याज सीड की खेती करके होती है सालाना 5 करोड़ की कमाई

    Successful Farmer Rahul Jadhav – पहले के समय में जहाँ खेती-बाड़ी के काम को गाँव के लोगों का ही कार्य माना जाता था, क्योंकि तब इसे लेकर लोगों में जागरूकता नहीं थी। यहाँ तक कि गाँव में रहने वाले युवा भी अपने पारम्परिक खेती-बाड़ी का अच्छा बिजनेस छोड़ पढ़-लिख कर शहर में जाकर अच्छी नौकरी करना चाहते थे, ताकि उन्हें उच्च वेतनमान भी प्राप्त हो और स्टेटस भी। लेकिन आजकल जैसे-जैसे लोग खेती बारे में समझ रहे हैं तो पढ़े लिखे लोग भी इस कार्य में दिलचस्पी ले रहे हैं और वे आधुनिक तरीके से खेती करने को प्रवृत्त हैं।

    ऐसे ही एक युवा किसान हैं, राहुल जाधव (Rahul Jadhav) , जो महाराष्ट्र के सतारा जिले के पिंपोड़े बुद्रुक (तहसील कोरेगांव) गाँव से सम्बन्ध रखते हैं। पहले राहुल जाधव खेती का काम नहीं किया करते थे, बल्कि बैंक में उनकी अच्छी खासी जॉब थी, परन्तु फिर उन्होंने बैंक की वह जॉब छोड़ कर आधुनिक तरीके से प्याज सीड की खेती शुरू कर दी। इस खेती के काम से उन्हें वह सब कुछ हासिल हुआ जो वह जॉब करके नहीं प्राप्त कर पा रहे थे उन्हें ना सिर्फ़ अपनी एक अलग पहचान मिली बल्कि आज करोड़ों की कमाई भी कर रहे हैं। चलिए जानते हैं कि उन्होंने बैंक ऑफिसर से एक सफल किसान बनने तक का सफ़र कैसे तय किया…

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    पहले थे पंजाब नेशनल बैंक में एग्रीकल्चर ऑफिसर

    राहुल जाधव ने महाराष्ट्र के राहुरी स्थित महात्मा फ़ुले कृषि विद्यापीठ से एग्रीकल्चर में MSC किया है। उसके पश्चात उनकी जॉब पंजाब नेशनल बैंक में लग गई, जहाँ वे करीब साढ़े चार वर्षों तक बतौर एग्रीकल्चर ऑफिसर काम किया करते थे। इस सम्बंध में राहुल बताते हैं कि उनके माता-पिता यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि वह अपना पुश्तैनी खेती का बिजनेस छोड़कर जॉब करें। फिर उन्होंने भी अपने माता-पिता की इच्छा अनुसार जॉब छोड़ कर खेती में क़िस्मत आजमाने का फ़ैसला किया।

    राहुल के पिताजी रामराव जाधव ज्वार, गेहूँ, चावल जैसी परंपरागत खेती करना पसंद नहीं करते थे, अतः वे प्याज सीड की खेती किया करते थे, सम्भवतः यही वज़ह रही होगी कि राहुल ने भी अपने पिताजी की ही तरह प्याज सीड की खेती करना उचित समझा।

    अब करते हैं सालाना 4 से 5 करोड़ रूपये का टर्नओवर, 180 से ज़्यादा किसानों को देते हैं रोज़गार

    राहुल बताते हैं कि वे प्याज की एक पूना फुरसुंगी नामक क़िस्म के बीजों का उत्पादन करते हैं। इस कार्य के लिए वे 85 से 110 ग्राम के प्याज को चुनते हैं। उनकी 12 एकड़ की ज़मीन है जिसमें वह यह कार्य करते हैं। प्याज़ सीड के उत्पादन कार्य हेतु वह क्षेत्र के अन्य किसानों की भी सहायता लेते हैं। आज उनके साथ क्षेत्र के किसान काम करते हैं, जिससे करीब 180 से ज़्यादा किसानों को रोजगार भी मिल रहा है।

    वे कहते हैं कि उनके द्वारा पैदा किए गए प्याज सीड मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में भेजे जाते हैं। आपको बता दें कि पिछले ही वर्ष उन्होंने करीब 25 से 30 टन प्याज के बीजों का प्रोडक्शन किया था और अब वे हर साल करीब 4 से 5 करोड़ रूपये का टर्नओवर कर रहे हैं।

    किस तरह सेलेक्ट की जाती है बीज की क्वालिटी?

    राहुल उनके द्वारा उत्पादित प्याज सीड की विशेषता बताते हुए कहते हैं कि उनके इन बीजों में 90 प्रतिशत तक कि जनरेशन क्षमता होती है। जिसके लिए ठीक प्रकार से बीज की ग्रेडिंग करने की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि वह दो प्रकार की क्वालिटी के बीज बेचा करते हैं। एक प्रीमियम क्वालिटी के तथा दूसरा इकोनॉमिकल क्वालिटी के बीज। उनके प्रीमियम क्वालिटी के बीज 1600 से 2000 प्रति किलो की क़ीमत में बेचे जाते हैं। उनके इन बीजों से जो प्याज पैदा होता है, उसकी गुणवत्ता इतनी अच्छी होती है कि उसे 6 से 8 महीने तक आराम से स्टोर करके रखा जा सकता है।

    कब लगती है प्याज की यह फसल, क्या है खासियत?

    राहुल जिस क़िस्म के बीज बेचते हैं, उसे स्थान और जलवायु के हिसाब से अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग समय पर उगाया जाता है। मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र में यह अक्टूबर-नवंबर में लगाते हैं, राजस्थान में जनवरी-फरवरी में और कर्नाटक में जून-जुलाई के महीने में लगाते हैं। यह प्याज गहरे गुलाबी रंग का होता है और इसकी अंकुरण क्षमता भी काफ़ी अच्छी होती है।

    राहुल बताते हैं कि अब उनके साथ 10 हज़ार से भी ज़्यादा किसान जुड़ गए हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण है कि लोग उनके बीज की क्वालिटी को पसंद करते हैं तथा उनके प्रोडक्ट पर विश्वास करते हैं। आज राहुल अपने निर्णय से पूरी तरह संतुष्ट हैं कि उन्होंने नौकरी छोड़ कर अपने पुश्तैनी काम खेती को अपनाया और इसी क्षेत्र में वह अपना बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, साथ ही अन्य लोगों को भी इस काम के लिए प्रेरित कर रहे हैं। Successful Farmer Rahul Jadhav

    यदि आप उनसे खेती से सम्बंधित किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे दिए नंबर और पते पर संपर्क कर सकते हैं-

    • नाम- राहुल जाधव
    • मोबाइल नंबर- 77750-64052
    • ब्रांड नाम-जाधव टेलरिंग फार्म
    • पता-पिंपोड़े बुद्रुक, तहसील कोरेगांव, ज़िला सतारा, महाराष्ट्र।

    Source – hindi.krishijagran.com