हर महीने सैकड़ों भूखों का पेट भरती हैं 62 वर्षीय “डोसा आज्जी”, सिर्फ़ 10 रुपए में देती हैं 2 डोसा 4 इडली

भारत में भुखमरी की समस्या एक ऐसी समस्या बन गई है जिसके कारण रोज़ ना जाने कितने लोग मारे जाते है। आज कई सारे ऐसे लोग हैं, जो अपने परिवार को 1 वक़्त का खाना खिलाने के लिए घंटों धूप में अपनी एडिया रगड़ते हैं, लेकिन नागपुर में रहने वाली एक वृद्ध महिला जो अपने कार्यों की वज़ह से “डोसा आज्जी” (Dosa Ajji of Nagpur) के नाम से फेमस हो गयी हैं, वे रोजाना ऐसे ही गरीबों को सिर्फ़ 10 रुपए में 2 डोसे और 4 इडली खिलाकर उनका पेट भरती हैं।

“डोसा आज्जी” का शुरुआती जीवन काफ़ी खराब परिस्थितियों में गुज़रा था, शादी के बाद भी उनके हालात सुधरे नहीं बल्कि और बिगड़ते चले गए। ज़िन्दगी में अनेक प्रकार के संघर्षों का सामना करते हुए फिर वे इस मुकाम पर पहुँच गईं, जहाँ उन्होंने अपनी ख़ुद की एक पहचान बनाई।

2 रुपए में इडली-डोसा खिलाने से की थी शुरुआत

डोसा आज्जी का वास्तविक नाम शारदा जी है, जो की 62 वर्षीय एक वृद्ध महिला हैं और प्रतिदिन गरीबों का पेट भरती है। असल में अज्जी एक मराठी शब्द है, जिसे दादी अथवा नानी को सम्बोधित करने लिए प्रयोग किया जाता है। लोगों ने शारदा जी की दयालुता और गरीबों के प्रति सहानुभूति देखकर शायद यह नाम रखा होगा।

उन्होंने अपनी ज़िंदगी में काफ़ी तकलीफें झेली हैं और कई दिनों तक भूखी भी रही हैं, इसलिए उन्हें पता है कि भूख और ग़रीबी का एहसास कैसा होता है। फिर इन्होंने वर्ष 2004 में एक फ़ूड स्टॉल खोला और गरीबों को सिर्फ़ 2 रुपए में खाना खिलाने का निर्णय लिया। खासतौर पर उन्होंने स्कूल के बच्चों और गरीब श्रमिकों के लिए यह स्टॉल खोला, ताकि उनका भी पेट भर सके।

अपने जीवन में बहुत-सी परेशानियों को झेलकर आगे बढ़ी हैं

आज्जी ने अपनी ज़िन्दगी में काफ़ी बुरे दिन देखे हैं एक समय ऐसा भी था जब अाज्जि अपने बेटे के लिए एक समय का खाना भी नहीं जुटा पाती थी। उन्हें जीवन में बहुत से दुःखों का सामना करना पड़ा, बुरी शादी का दुःख, माँ की मृत्यु, ग़रीबी और भुखमरी जैसी अनेक परेशानियाँ झेली, पर कभी हार नहीं मानी और सभी मुसीबतों का डट कर सामना किया। ऐसी ज़िन्दगी जीने के बाद आज्जी नहीं चाहती थी कि कोई और भी उनकी तरह भूखा रहे। इसलिए जब वह थोड़ा आर्थिक रूप से सशक्त हुई तो उन्होंने स्कूल के गरीब बच्चो और मजदूरों के लिए खाने का स्टोल खोला।

महंगाई के बावजूद भी नहीं बढ़ाए आज्जी ने दाम

हम सभी जानते है कि महंगाई दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। आज्जी को भी इसका सामना करना पड़ा। लेकिन अाज्जि ने अपने डोसा और इडली के दाम नहीं बढ़ाए। महंगाई बढ़ने के कारण उन्होंने पहले 2 डोसा और 4 इडली क़ीमत 2 से 4 रुपए कर दी थी और आज भी आज्जी डोसा और इडली मात्र 10 रुपए में ही बेच रही हैं।

क्या है आज्जी की मासिक कमाई

आज्जी का कहना है कि उनको पैसों से ज़्यादा लोगों का पेट भरकर ख़ुशी मिलती है। जब लोग खाना खाकर उनका शुक्रिया अदा करते है तो उन्हें बहुत सुकून महसूस होता है। आज्जी बताती है कि उनकी स्टॉल पर रोज़ लगभग 40 ग्राहक खाना खाने आते हैं तथा एक महीने में वे 10 हज़ार रुपए कमा लेती हैं, कमाई के इन रुपयों से वह सब्जियाँ और स्टॉल के लिए अन्य ज़रूरत का सामान ले आती हैं।

आज भरापूरा परिवार है, पर काम नहीं छोड़ा

आज आज्जी का भी एक सुखी परिवार है। उन्होंने काम करके अपने बेटे को पढ़ाया-लिखाया। अब तो उनका बेटा विवाहित भी हो चुका है और उनकी एक 2 साल की पोती भी है। तब भी उन्होंने अपना काम नहीं छोड़ा है।

अगर आज्जी जैसे और भी लोग दुनिया में आ जाए तो इस दुनिया में कोई गरीब कभी भूखा नहीं सोएगा। वास्तव में “डोसा आज्जी” मानवता का फ़र्ज बख़ूबी निभा रही हैं और दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।