70 साल की उम्र में दिव्यांग व्यक्ति नदियों से निकाल रहा है प्लास्टिक, PM मोदी कर चुके हैं तारीफ

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आज के दौर में हर व्यक्ति अपनी लाइफ में इतना ज़्यादा बिजी है कि उसे अपने परिवार के साथ कुछ पल बैठने का भी समय नहीं होता। ऐसे में जब इंसान अपने परिवार को ही समय नहीं दे पाता, तो उसे पर्यावरण की फ़िक्र करने का ख़्याल तो कभी आता ही नहीं होगा।

लेकिन हमारे देश में एक ऐसा शख़्स भी रहता है, जो अपने पैरों पर सही से खड़े भी नहीं हो पाते लेकिन पर्यावरण को साफ़ रखने के लिए प्लास्टिक की बोतलें इकट्ठा करने का काम करते हैं। आइए जानते हैं उस शख़्स के बारे में, जिनकी कहानी आपको भी पर्यावरण को साफ़ सुथरा रखने के लिए प्रेरित करेगी।

दिव्यांग बुज़ुर्ग NS Rajappan की शानदार पहल

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कोच्चि के रहने वाले एनएस राजप्पन (NS Rajappan) का ज़िक्र किया था, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। लेकिन उनके काम की तारीफ पूरे भारत वर्ष में की जा रही है। दरअसल एनएस राजप्पन झील और नदियों से प्लास्टिक की बोतलें निकालने का काम करते हैं, जबकि वह अपने पैरों पर सही से खड़े भी नहीं हो पाते हैं।

एनएस राजप्पन की उम्र 70 साल है, जो केरल के कोट्टयम जिले में रहते हैं। वह बिना किसी स्वार्थ के पिछले 6 सालों से वेम्बनाड झील समेत आसपास की नदियों में साफ़ सफ़ाई करने का काम कर रहे हैं। राजप्पन के घुटने से नीचे का हिस्सा पैरेलाइज्ड है, जिसकी वज़ह से वह सही से चल फिर नहीं पाते।

लेकिन बावजूद इसके राजप्पन अपने हाथों के सहारे चलते हैं और नाव के जरिए झील में पड़ी प्लास्टिक की बोतलों को बाहर निकलने का काम करते हैं। इस काम के लिए राजप्पन रोजाना एक छोटी-सी नाव किराए पर लेते हैं और फिर उसे चप्पू की मदद से चलाकर पानी में पड़ा प्लास्टिक और वेस्ट बाहर निकालते हैं। राजप्पन रोजाना इस काम को अंजाम देते हैं और पूरे दिन मेहनत करने के बाद मुश्किल से उन्हें 12 रुपए की कमाई होती है।

निस्वार्थ मन से प्रकृति की सेवा

आपको बता दें कि राजप्पन जिस नाव में पूरा दिन प्लास्टिक की बोतल इकट्ठा करने का काम करते हैं, उसे पूरा भरने पर भी प्लास्टिक का वज़न 1 किलोग्राम तक ही हो पाता है। ऐसे में जब वह झील से नाव भरकर प्लास्टिक बाहर निकलते हैं, तो उसे बेचने पर उन्हें सिर्फ़ 12 रुपए मिलते हैं।

लेकिन राजप्पन को इस बात की ख़ुशी है कि वह पर्यावरण को साफ़ सुथरा रखने और पानी से प्लास्टिक को बाहर निकालने का काम कर रहे हैं। क्योंकि आजकल किसी के पास इतना वक़्त नहीं है कि वह पर्यावरण पर ध्यान दे सके। राजप्पन ने अपनी पूरी ज़िन्दगी पानी के आसपास रहकर बिताई है, ऐसे में जब वह पानी में गंदगी और प्लास्टिक को देखते हैं तो उन्हें बहुत बुरा लगता है।

प्रकृति से असीम प्रेम करने वाले राजप्पन निस्वार्थ मन से पर्यावरण को साफ़ सुथरा तो कर ही रहे हैं, साथ में उनकी पत्नी भी इस काम में उनकी मदद करती हैं। दिनभर प्लास्टिक इकट्ठा करने के बाद राजप्पन को जो 12 रुपए मिलते हैं, दोनों पति पत्नी उसे से अपना गुज़ारा चलाते हैं।

टूटे-फूटे घर में रहते हैं राजप्पन

राजप्पन और उनकी पत्नी एक पुराने और टूटे-फूटे घर में रहते हैं, जिसकी मरम्मत करवाने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं हैं। वहीं सिर्फ़ 12 रुपए की कमाई से राजप्पन की रोज़ी रोटी नहीं चल पाती, इसलिए कभी कभार उनके पास खाना खाने के लिए भी नहीं होता है। ऐसे में राजप्पन के पड़ोस में रहने वाली एक महिला, जिसे वह अपनी बहन मानते हैं वह राजप्पन और उनकी पत्नी को खाना खिला देती हैं।

राजप्पन चाहते हैं कि वह पैसे इकट्ठा करके एक बड़ी नाव खरीद लें, ताकि उसके जरिए वह ज़्यादा से ज़्यादा प्लास्टिक इकट्ठा करके सफ़ाई और कमाई के काम को बढ़ा सके। राजप्पन चलने फिरने में असमर्थ हैं, इसलिए वह 70 साल की उम्र में कोई नौकरी नहीं कर सके। यही वज़ह है कि उन्हें प्लास्टिक बेचकर मिलने वाले पैसों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

दरअसल 2 साल पहले आई बाढ़ में राजप्पन का घर, खेती और जमा पूंजी पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी, हालांकि इसके बावजूद भी उन्होंने हालातों से हार नहीं मानी। राजप्पन पिछले 6 सालों से झील और नदियों से प्लास्टिक निकलाने का काम कर चुके हैं, जिसकी प्रशंसा देश भर में हो रही है।

पीएम मोदी और फ़िल्मी सितारे भी कर चुके हैं तारीफ

एनएस राजप्पन जो काम कर रहे हैं, वह उनकी कमाई के साथ-साथ पर्यावरण को साफ़ करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। यही वज़ह है कि जब इस वृद्ध व्यक्ति को कोई नदी की सफ़ाई करते देखता है, तो सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाता।

एक्टर रणदीप हुड्डा ने जब राजप्पन को पर्यावरण साफ़ रखने की पहल करते हुए देखा, तो उन्होंने तुरंत राजप्पन का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। रणदीप हुड्डा ने राजप्पन की तारीफ करते हुए कहा कि कोई देश के प्रति अपना प्यार कैसे दिखा सकता है, शायद इस तरह। देश के प्रति प्यार काम से झलकता है, न सिर्फ़ शब्दों और सोशल मीडिया पर। राजप्पन जी को सलाम।

वहीं पीएम मोदी भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में एनएस राजप्पन (NS Rajappan) के काम और आत्मविश्वास की तारीफ कर चुके हैं, जो दिव्यांग होने के बावजूद भी पर्यावरण के प्रति इतना ज़िम्मेदार रवैया अपना रहे हैं। हम और आप जैसे सैकड़ों युवाओं को एनएस राजप्पन से पर्यावरण को साफ़ सुथरा रखने के गुण सीखने चाहिए, राजप्पन जी को दिल से सलाम।

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