इन खूबियों के चलते कड़कनाथ मुर्गे की है मार्केट में इतनी डिमांड, कीमत है 900-1500 रुपए प्रति किलो

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    इस दुनिया में आपने बहुत तरह के लोग देखे होंगे। लेकिन यदि हम खाने पीने की बात करें, तो इसमें मुख्यत: दो तरह के लोग पाए जाते हैं। एक तो शाकाहारी जो केवल सादा भोजन खाना पसंद करते हैं। दूसरे मांसाहारी, इन्हें मटन, चिकन जैसी चीजें मिल जाएँ तो बड़े शौक से खाते हैं।

    वैसे तो आपने लोगों को सामान्य मुर्गे का मांस खाते हुए ही देखा होगा, लेकिन अब लोगों के बीच कड़कनाथ मुर्गा (Kadaknath Chicken Breed) भी काफी मशहूर हो चुका है। कड़कनाथ मुर्गे का चिकन अब देश के ‘फाइव स्टार’ होटलों तक में भी परोसा जाने लगा है। इसलिए आइए आज हम आपको कड़कनाथ मुर्गे के बारे में विस्तार से बताते हैं।

    ‘कड़कनाथ मुर्गा’ (Kadaknath Chicken Breed)

    दूसरे मुर्गे जहाँ सफेद रंग के होते हैं, वहीं ‘कड़कनाथ मुर्गा’ (Kadaknath Chicken Breed) काले रंग का पाया जाता है। यदि आपने अभी तक कड़कनाथ मुर्गा नहीं देखा है तो इन्हें आप तस्वीरों में देख सकते हैं कि ये किस तरह का होता है। इस प्रजाति की ख़ास बात ये है कि ये प्रजाती अभी तक केवल भारत में ही पाई जाती है।

    क्यों है ‘कड़कनाथ मुर्गे’ की ज़्यादा मांग?

    कड़कनाथ मुर्गे की मांग हाल के दिनों में भारत में तेजी से बढ़ी है। इसके पीछे वज़ह ये है कि लोगों को इसका बना चिकन ख़ूब पसंद आया है। इसी वज़ह से आज ‘कड़कनाथ मुर्गे’ का चिकन देश के कई फाइव स्टार होटलों तक में परोसा जाने लगा है। फाइव स्टार में जाने वाले अमीर लोगों की ये मुर्गा पहली पसंद बन चुका है।

    कड़कनाथ मुर्गे के काले रंग की वज़ह से इसे ‘कालीमासी’ मुर्गा भी कहा जाता है। सामान्य सफेद मुर्गों में जहाँ प्रोटीन केवल 18 से 20 फीसदी तक पाया जाता है, तो वहीं कड़कनाथ मुर्गे में 25 फीसदी तक प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है। इसके साथ ही कड़कनाथ मुर्गा खाने में दूसरे मुर्गों के मुकाबले ज़्यादा स्वादिष्ठ, पोष्ठिक और सेहद के लिए ज़रूरी माने जाने वाले तमाम गुणों से भी भरपूर होता है।

    आदिवासियों के बीच भी ‘कड़कनाथ मुर्गे’ के कई मायने

    भारत में आमतौर पर कड़कनाथ मुर्गे की तीन प्रमुख प्रजातियाँ पाई जाती है। इसमें जेट ब्लैक, गोल्डन ब्लैक और पेसिल्ड ब्लैक शामिल हैं। कड़कनाथ मुर्गे का वज़न करीब 1.8 से लेकर 2.0 किलो तक हो सकता है। दशकों पहले मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के और छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के आदिवासी लोग इसे पालते थे। क्योंकि आदिवासी लोग इसे बेहद पवित्र मानते थे। इसलिए हर साल दीवाली के बाद होने वाली पूजा पर देवी के सामने कड़कनाथ मुर्गे की बलि देकर इसे खाने का रिवाज रहा है। धीरे-धीरे इसकी पहचान देश के दूसरे भागों में भी बनने लगी।

    दूसरे मुर्गो से ज़्यादा है इसकी कीमत

    बाजार में जहाँ दूसरे मुर्गे बेहद कम क़ीमत में भी उपलब्ध हो जाता है, तो वहीं कड़कनाथ की क़ीमत आज 900 से लेकर 1500 रुपए किलो तक होती है। मुर्गे की ऐसी प्रजाति दुनिया में और कहीं नहीं मिलती है। आपको बता दें कि आज भारत में मुर्गों की मूल रूप से 4 प्रकार की शुद्ध नस्लें पाई जाती हैं। जिनमें से प्रमुख हैं असील, चिटगोंग, कड़कनाथ और बुसरा मुर्गा।

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