पिछले 1 साल से पति ने पत्नी को टॉयलेट में बंद करके रखा था, बाहर निकलते ही बोली, मुझे रोटी दो

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ANI

कभी-कभी ऐसा लगता है कि महिलाओं को लेकर घरेलू मामला के लिए जितने भी कानून बने हैं वह सिर्फ़ पेपर पर ही सीमित हैं। वास्तविक जीवन में इन कानूनों का लाभ, महिलाएँ उतना नहीं उठा पाती, जितना कि उन्हें पेपर पर दिए जाते हैं। बहुत सारे केसेज तो पुलिस तक भी नहीं पहुँच पाते हैं और वह अंदर ही अंदर दबकर रह जाते हैं। आज भी ऐसी समस्याएँ हमारे समाज का एक अभिन्न हिस्सा है।

ऐसा ही एक घरेलू का मामला सामने आया है, जिसमें एक पति ने अपनी पत्नी को पिछले एक साल से टॉयलेट में बंद करके रखा था। यह घटना रिशपुर गाँव की है। उस महिला को महिला सुरक्षा और बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने अपनी टीम के साथ बचाया।

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए, रजनी गुप्ता ने कहा कि “मुझे जानकारी मिली कि एक महिला को पिछले 1 साल से उसके पति द्वारा शौचालय में बंद किया गया है। तब मैंने इस पर तुरंत एक्शन लिया और अपनी टीम के साथ वहाँ पहुँच गई। जब हम और हमारी टीम यहाँ पहुँचे तो हमने पाया कि यह मामला तो सच है। महिला बाहर निकलते ही बोली, मुझे रोटी दो।

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उन्होंने आगे यह भी कहा कि “ऐसा कहा जा रहा है कि वह मानसिक रूप से बीमार है, लेकिन यह सच नहीं है। हमने उससे बात की है और यह स्पष्ट था कि वह मानसिक रूप से बीमार नहीं है। लेकिन हम इस बात की पुष्टि भी नहीं कर सकते हैं कि वह मानसिक रूप से अस्थिर है या नहीं। लेकिन महिला अंदर शौचालय में बंद थी। शौचालय से ही हमने उसे बचाया और उसके बाल धोए। हमने पुलिस से शिकायत भी दर्ज़ की है। पुलिस सारे मामले का पता लगाकर उसके अनुसार कार्यवाही करेगी।”

वहीं दूसरी ओर पीड़िता के पति का दावा है कि वह मानसिक रूप से बीमार है। उसके पति ने यह कहा कि “वह मानसिक रूप से बीमार थी। हम जब भी उसे बाहर बैठने के लिए कहते हैं तो वह वहाँ नहीं बैठती है। हम उसे डॉक्टर के पास भी ले गए हैं, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।”

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पुलिस ने इस मामले को लेकर शिकायत दर्ज की है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि “रजनी गुप्ता ने गाँव में जाकर उस महिला को बचाया, जिसे उसके पति नरेश ने एक साल से अधिक समय तक शौचालय में बंद कर दिया था। हमने शिकायत दर्ज कर ली है और हम जांच के बाद ही कोई कार्यवाही करेंगे। अगर यह कहा जा रहा है कि महिला मानसिक रूप से बीमार है, तो हम डॉक्टर से इसकी सलाह भी लेंगे।”

अंततः सबसे यही अपील है कि यदि आप या आपके कोई परिचित अपने साथी या किसी अन्य परिवार के सदस्य द्वारा घरेलू मामला से पीड़ित हैं, तो इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, मदद के लिए बाहर जाने में संकोच न करें।

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