इन कंपनियों में लागू हुई नई पॉलिसी, हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी पर रहेंगे कर्मचारी

नौकरी पेशा लोगों को हमेशा यह चिंता सताती है कि अगर वह ऑफिस से छुट्टी ले लेंगे, तो उनकी सैलेरी कट जाएगी। ऐसे में महंगाई भरे इस दौर में कम सैलेरी में घर खर्च करना मुश्किल हो जाता है, जिसकी वजह से कर्मचारी हफ्ते भर कंपनी में काम करते हैं और वीकेंड के मौके पर एक छुट्टी लेकर संतुष्ट रहते हैं।

लेकिन इस वजह से कर्मचारियों की सेहत पर लगातार बुरा असर पड़ रहा है, जिसकी वजह से लेबर मिनिस्ट्री ने कर्मचारियो के हित के लिए अहम फैसला लिया है। इस फैसले के तहत अब कंपनी में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी की पॉलिसी को शुरू किया जाएगा, जिसका असर कर्मचारी की सैलेरी पर नहीं पड़ेगा।

4 दिन काम और 3 दिन आराम

यूनाइटेड किंगडम में लगभग 100 से ज्यादा कंपनियों ने लेबर मिनिस्ट्री के फैसले को लागू करते हुए कर्मचारियों को हफ्ते में 4 दिन काम करने और 3 दिन छुट्टी पर रहने का आदेश जारी किया है, जिसकी वजह से कर्मचारियों के चेहरे पर खुशी साफ तौर पर देखी जा सकती है। इस बदलाव का असर कर्मचारियों की सैलेरी पर नहीं पड़ेगा और उन्हें पहले की तरह पूरी तनख्वाह दी जाएगी।

यूके की इन 100 कंपनियों में एटम बैंक और एविन ग्लोबल मार्केटिंग कंपनी पहली ऐसी 2 कंपनियाँ बन चुकी हैं, जिन्होंने अपने कर्मचारियों को 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी देने का ऐलान किया है। इन दोनों ही कंपनियों में 450 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, जहाँ पहली बार कर्मचारियों को हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम करना पड़ेगा।

लेबर मिनिस्ट्री और कंपनियों का मानना है कि हफ्ते में 5 की जगह 4 दिन काम करने से प्रोडक्टिविटी अच्छी होती है, जबकि कर्मचारी पूरी मेहनत और लगन के साथ काम करते हैं। इसके अलावा कर्मचारियों को अपने निजी काम निपटाने और आराम करने के लिए हफ्ते में 3 दिन मिल जाते हैं, जिसकी वजह से वह रिलेक्स रहते हैं और उनकी सेहत पर बुरा असर भी नहीं पड़ता है।

यूनाइटेड किंगडम में इस फैसले को लागू करने के पहले सर्वे किया गया था, जिसमें 88 प्रतिशत कंपनियों ने यह माना था कि हफ्ते में 4 दिन काम करने से प्रोडक्टिविटी बढ़ती है और कंपनी का माहौल भी खुशनुमा होता है। यही वजह है कि यूके में 100 से ज्यादा बड़ी कंपनियों ने 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी वाली पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। हालांकि भारत में यह पॉलिसी लागू होगी या नहीं, इस बारे में कुछ भी स्पष्ट रूप से कहा नहीं जा सकता है।