15 लाख रुपए में शुरू की कंपनी, 5 रुपए में स्नैक बेचकर कमा रहे करोड़ों रुपए, जानिए ऐसा क्या है आइडिया

हम भारतीय अपने स्वाद को लेकर काफ़ी सजग रहते हैं, एक बार किसी चीज का स्वाद हमारी ज़ुबान पर चढ़ जाए तो सालों साल तक ताज़ा रहता है। ऐसे ही एक स्नैक है नमकीन, जिसे आमतौर पर सुबह या शाम की चाय के साथ खाया जाता है। भारतीय बाजारों में कई तरह की नमकीनें मौजूद हैं, जिसमें तीखे से लेकर खट्टा मीठा स्वाद शामिल है। शहरी बाजारों में यूं तो नमकीन के कई फेमस ब्रांड हैं, लेकिन क्षेत्रीय इलाकों में नमकीन का एक ऐसा ब्रांड मशहूर है। जिसका स्वाद अगर कोई एक बार चख ले, तो ज़िन्दगी भर न भूले। इस कंपनी की शुरूआत की कहानी बेहद दिलचस्प है, जिसे पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे-

क्षेत्रीय कंपनी की प्रसिद्धि का सफर

अमित कुमार, अपूर्व कुमार और अरविंद मेहता नामक तीन दोस्तों ने साल 2002 में प्रताप नमकीन कंपनी की शुरूआत की थी, आज इस कंपनी के देश भर में चार कारखानें मौजूद हैं। इन कारखानों से भारत के 24 राज्यों के 168 स्टोर हाउस और 2,900 वितरकों को नमकीन सप्लाई की जाती है। प्रताप नमकीन कंपनी (Prataap Snacks) ने इतना लंबा सफ़र तय करने में कई कठिनाईयों का सामना किया, लेकिन आखिरकार इस कंपनी को शुरू करने वाले लोगों के हाथ कामयाबी का खजाना लग ही गया।

एक आइडिया ने बदल दी जिंदगी

प्रताप नमकीन कंपनी (Prataap Snacks) को खोलने का आइडिया अमित कुमार का था, जिन्होंने 10 सालों तक एक स्नैक्स कंपनी में काम किया था। हालांकि अमित ने स्नैक की कंपनी खोलने के बजाय दूसरे व्यवसाय में हाथ आजमाते हुए साल 2001 में केमिकल मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस की शुरूआत की। लेकिन एक साल के अंदर ही उस कंपनी के ऊपर 6 करोड़ रुपए का कर्ज़ चढ़ गया, जिसकी वज़ह से अमित ने उस कारोबार को बंद कर दिया।

अमित को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि कारोबार के बाज़ार में उनको पहली कोशिश में ही इतना बड़ी असफलता हाथ लगेगी, हालात ये थे कि अमित को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लेकर कंपनी पर चढ़े कर्ज़ का भुगतान करना पड़ा। लेकिन अमित के मन में अभी भी अपना बिजनेस शुरू करने और उसे ऊंचाईयों तक ले जाने की उम्मीद ज़िंदा थी, लिहाजा उन्होंने नए बिजनेस आइडिया पर काम करना शुरू कर दिया।

ऐसे शुरू किया नमकीन का बिजनेस

इसके बाद अमित ने साल 2002 में अपने भाई अपूर्व और दोस्त अरविंद के साथ मुलाकात की और नमकीन की स्नैक कंपनी शुरू करने का सुझाव दिया। अपूर्व और अरविंद को अमित का यह आइडिया काफ़ी पसंद आया, लिहाजा तीनों ने मिलकर इंदौर में प्रताप नमकीन (Prataap Snacks) का पहला कारख़ाना शुरू किया। इस कारोबार की शुरुआत करने के लिए तीनों दोस्तों ने बहुत ही मेहनत से 15 लाख इकट्ठा किए, उन पर परिवार का दबाव भी था। क्योंकि अगर नमकीन का व्यापार नहीं चलता, तो उनके 15 लाख रुपए डूब जाते।

हालांकि तीनों दोस्त इस रिस्क को लेने का फ़ैसला कर चुके थे, लिहाजा उन्होंने प्रताप स्नैक्स की नींव रख दी। स्नैक कंपनी की शुरुआत करते ही उन्हें एक स्थानीय खाद्य प्रसंस्करण (FOOD PROCESSING) और विनिर्माण संयंत्र (MANUFACTURING PLANT) से रिंग स्नैक्स के 20,000 बॉक्स तैयार करने का आर्डर मिला था। इसके बाद प्रताप स्नैक्स की डिमांड और नेटवर्क इंदौर के स्थानीय विक्रेताओं तक फैलने लगा, जिसकी वज़ह से कंपनी धीरे-धीरे मुनाफा कमा रही थी। हालांकि कम पैसों की वज़ह से प्रताप स्नैक्स के पास सीमित उपकरण थे, इसके साथ उनके पास MANUFACTURING PLANT लगाने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं थी।

लेकिन तमाम मुश्किलों के बावजूद भी अमित, अपूर्व और अरविंद ने प्रताप स्नैक्स को जारी रखा, जिसका नतीजा ये हुआ कि कंपनी ने पहले साल 22 लाख रुपए कमाए। इसके बाद प्रताप स्नैक्स की डिमांड शहर में बढ़ने लगी और जिसके तहत कंपनी ने दूसरे साल 1 करोड़ रुपए और तीसरे साल 7 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया। इस मुनाफे का साथ ही प्रताप स्नैक्स का बाज़ार पर कब्जा हो चुका था और कंपनी का टर्नओवर साल दर साल बढ़ता जा रहा था।

नए ब्रांड से भी कमाया ख़ूब पैसा (Yellow Diamond)

साल 2011 तक प्रताप स्नैक्स के जरिए अमित, अपूर्व और अरविंद अच्छा पैसा कमा चुके थे, जिसके बाद उन्होंने उसी साल ख़ुद का MANUFACTURING PLANT स्थापित कर लिया। इस प्लांट की नींव रखने के साथ ही उन्होंने येलो डायमंड (Yellow Diamond) के नाम से अपने ब्रांड को बाज़ार में प्रमोट किया, जिसका सालाना टर्नओनर 150 करोड़ रुपए के पार पहुँच गया था।

आज येलो डायमंड (Yellow Diamond) इतना फेमस हो चुका है कि आप में से बहुत से लोगों ने इस कंपनी में बने स्नैक्स का स्वाद चखा होगा। सिर्फ़ क्षेत्रीय इलाकों में ही नहीं बल्कि शहरों में भी येलो डायमंड की धूम है, जो बड़ी-बड़ी स्नैक्स कंपनियों को टक्कर देता है। साल 2011 से 2015 तक येलो डायमंड की हिस्सेदारी स्नैक्स बाज़ार में एक प्रतिशत से बढ़कर चार प्रतिशत तक हो गई थी। हालांकि अमित और उनके बिजनेस पार्टनर्स भविष्य में देश के स्नैक्स मार्केट में कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राप्त करना चाहते हैं। इसके लिए येलो डायमंड अपने प्रोडक्ट की गुणवत्ता का ख़ास ध्यान रखता है, ताकि उनके ब्रांड पर लोगों का भरोसा बना रहे।

छोटे से शहर से निकलकर देश भर में फैलाया व्यापार

किसी भी छोटे शहर में शुरू किए व्यापार को देश भर में फ़ैलाना और उसकी गुणवत्ता बनाए रखना कंपनी के लिए बेहद मुश्किल होता है। येलो डायमंड (Yellow Diamond) का शुरुआती सफ़र मुश्किल ज़रूर था, लेकिन उसकी नींव रखने वाले लोग कंपनी को नेशनल लेवल बिजनेस में बदल चुके हैं।

आज येलो डायमंड (Yellow Diamond) देश की कई नामी स्नैक्स कंपनियों को टक्कर दे रहा है, इसके साथ ही येलो डायमंड ने बिलियन डॉलर क्लब में शामिल होने के लिए अपना आईपीओ भी निकाला है। किसी ने सच ही कहा है कि कड़ी मेहनत और विश्वास के दम पर बड़ी से बड़ी कामयाबी को हासिल किया जा सकता है, बस आपके पास एक बेहतरीन आइडिया होना चाहिए।