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पति की मृत्यु के बाद 4 बच्चों के साथ 30 लाख रूपये का कर्ज था, अब अंगूर की खेती से हर साल कमातीं हैं 40 लाख

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अक्सर मुश्किल परिस्थितियों में ही इंसान की पहचान होती है कि कौन कितना कमजोर है और कौन कितना मज़बूत और जो लोग इन मुश्किल परिस्थितियों को पार कर जाते हैं तो आगे सफलता का द्वार उनके लिए बहुत आसानी से खुल जाता है। ठीक ऐसी ही एक महिला किसान हैं जिन्हें बहुत संघर्षों से गुजरना पड़ा।

पति की मृत्यु के बाद 3 बेटी और एक बेटे की जिम्मेदारी के साथ-साथ इनके ऊपर 30‌ लाख रुपए का कर्ज़ भी इनके ऊपर आ गया। लेकिन हार ना मानकर इन्होंने उन सभी मुश्किलों को अपनी ज़िन्दगी से दूर किया और आज एक सशक्त महिला किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है और आज लाखों रुपए कमा रही हैं। आइए जानते हैं इनकी पूरी कहानी को…

संगीता बोरासते (Sangeeta Borasate)

46 वर्षीय संगीता बोरासते (Sangeeta Borasate) महाराष्ट्र के नासिक में निफाड तालुका की रहने वाली हैं। संगीता अंगूर की खेती करने के लिए जानी जाती हैं वह जिस इलाके में रहती हैं और खेती करती हैं वह पूरा इलाक़ा ही अंगूर की खेती के लिए जाना जाता है और इनके खेतों से हुए उत्पादन का लगभग 50% बाहर के देशों में निर्यात किया जाता है। इस वज़ह से खेती से इनकी आमदनी अच्छी खासी हो जाती है। लेकिन संगीता के यहाँ तक का सफ़र बहुत कठिन था।

पति नौकरी छोड़, खेती में जुट गए

संगीता ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि 1990 में 15 साल की उम्र में ही उनकी शादी अरुण से हुई, जिसके बाद वह निफाड शिफ्ट हो गई। उनके पति अरुण बैंक के कर्मचारी थे। उसी दौरान परिवार में कुछ घरेलू विवादों के कारण ज़मीन का बंटवारा हुआ जिसमें अरुण और संगीता को 10 एकड़ ज़मीन मिली। उसके बाद संगीता के पति अरुण ने सोचा क्यों ना इस 10 एकड़ पर खेती की जाए। काफ़ी सोच विचार करने के बाद उन्होंने अपनी बैंक की नौकरी छोड़ दी और खेती में जुट गए।

दुर्भाग्यवश फ़सल कटाई के कुछ दिन पहले ही पति की मृत्यु हो गई

आगे संगीता ने बताया कि “हमारे पति को खेती की पूरी जानकारी ना होने के कारण कई बार नुक़सान भी उठाना पड़ा और इसी नुक़सान की वज़ह से हमारे ऊपर क़र्ज़ बढ़ता गया जिसके कारण हमें अपनी ढाई एकड़ ज़मीन बेचनी पड़ी। इसके बावजूद भी हम नहीं खेती करना जारी रखा। साल 2014 में जब हमें लगा कि साल हमारे खेतों में फ़सल अच्छी होगी जिससे हमारा क़र्ज़ ख़त्म हो जाएगा।

लेकिन दुर्भाग्यवश फ़सल कटाई के कुछ दिन पहले ही पति की मृत्यु हो गई। उसके बाद तीन बेटियों, एक बेटा समेत 30 लाख रूपये क़र्ज़ चुकाने की सारी ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई।” संगीता ने बताया कि उस समय खेती के बारे में थोड़ी भी जानकारी नहीं थी की खेती कैसे की जाती है, इसमें क्या होता है क्या नहीं? आर्थिक स्थिति इतनी बुरी थी कि वह मजदूरों को भी काम पर नहीं रख सकती थी। तब धीरे-धीरे उन्होंने खेती के बारे में चीजों को जानना शुरू किया।

संगीता ने अपने संघर्षों के बारे में बताया कि “एक बार की बात है उस दिन दिवाली की रात थी और उस दिन मुझे रात के 9 बजे तक खेत में ही रुकना पड़ा था, समस्या यह हुई थी कि मेरा ट्रैक्टर मिट्टी में फंस गया था और उसे लगातार निकालने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादातर काम के लिए अपने रिश्तेदारों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब खेती की सारी जिम्मेदारी इनके ऊपर आ गई।”

खेती करने के दौरान संगीता को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कभी बारिश के कारण कभी सुखे के कारण बार-बार उनकी फ़सल ख़राब हो जाती थी। संगीता अंगूर की खेती करती थी और अंगूर के बेल के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यह बेल मौसम पर बहुत ज़्यादा निर्भर करते हैं। अगर मौसम ठीक रहा तो फ़सल अच्छी होगी और अगर मौसम खराब हुआ तो फ़सल खराब हो सकती है। कई-कई बार तो उन्हें रात-रात भर जाग कर बॉनफायर करना पड़ा ताकि वह अपने बागान को गर्म रख सके।

सह्याद्री फॉर्म्स के द्वारा काफ़ी सहयोग मिला

लेकिन कहा जाता है कि अगर आप मेहनत करेंगे तो उसका फल एक न एक दिन आपको ज़रूर मिलेगा। आगे चलकर संगीता को भी सह्याद्री फॉर्म्स के द्वारा काफ़ी सहयोग मिला। उन्होंने संगीता के खेतों में हुए अंगूरों को बाजारों तक पहुँचाने में बहुत मदद की। अच्छी मार्केटिंग के लिए उन्होंने अंगूरों की गुणवत्ता पर काफ़ी फोकस किया ताकि बाहर के देशों में उसे एक्सपोर्ट करने में कोई समस्या ना हो।

अब खेतों से हुई आमदनी से संगीता ने ना सिर्फ़ अपना सारा क़र्ज़ चुकाया है बल्कि अपनी दोनों बेटियों की शादी भी कर दी है और एक बेटी की शादी की तैयारियों में जुटी हैं। अंगूर की खेती से संगीता सलाना 40 लाख रुपए की आमदनी करती हैं, लेकिन उनका प्रॉफिट 15 लाख रुपए का होता है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर पैसे तो अंगूर के रखरखाव में ही ख़र्च हो जाते हैं।

लॉकडाउन के दौरान 30 लाख रूपये का नुक़सान भी हुआ

आज के समय में संगीता को खेती में काफ़ी अनुभव हो चुका है और उन्हें ख़ुद पर गर्व भी महसूस होता है। उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में सीखा कि कभी भी मुश्किलों से डरकर हारना नहीं चाहिए बल्कि कितनी भी मुश्किल हो अपना हौसला बनाए रखना चाहिए। लॉकडाउन के दौरान भी संगीता को काफ़ी परेशानी हुई, क्योंकि उस समय अंगूरों का निर्यात पूरी तरह से बंद हो चुका था और सारे अंगूर खराब हो रहे थे इस कारण संगीता को 30 लाख रूपये का नुक़सान भी हुआ। इसके बावजूद भी उन्होंने लगभग 15 लाख रुपए का मुनाफा कमाया। इसके साथ ही खराब हो रहे अंगूरों की प्रोसेसिंग करके किसमिस बनाई और उसे बाजारों में बेचा।

अंत में संगीता (Sangeeta Borasate) ने कहा कि वह हर समय किसी भी मुश्किलों का सामना करने के लिए ख़ुद को तैयार रहती हैं। उन्होंने कहा कि मुझे ख़ुद पर भरोसा है कि चाहे कितना भी नुक़सान क्यों ना हो, मैं मेहनत के द्वारा उस नुक़सान का भरपाई ज़रूर कर लूंगी। इस तरह संगीता की इस कहानी को जानने के बाद सारे लोग हौसले से भर जाते हैं।

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News Desk
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