यह पुलिस अफसर गुमशुदा बच्चों को उनके घरवालों से मिलाते हैं, अब तक 500 से अधिक बच्चों को मिलवा चुके हैं उनके घरवालों से

हरियाणा के पंचकुला में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग में कार्यरत ASI राजेश कुमार गुमशुदा हुए बच्चों, या फिर वह बच्चे जो कई-कई वर्षों से अपने परिवार वालों से जुदा है, को उनके घरवालों से मिलाने का काम करते है। ऐसे में उन बच्चों के घर वाले उन्हें भगवान से भी बड़ा मानते हैं और अभी तक राजेश ने पूरे देश से क़रीब पाँच सौ से ज़्यादा बच्चों को उनके घरवालों से मिलाया है। जिसमें 50 बच्चे तो दिल्ली के ही थें।

इस बारे में क्या कहते हैं राजेश

ए एस आई राजेश का कहना है कि उन्हें ये काम करने में बहुत सुकून मिलता है और घरवाले जब अपने खोए हुए बच्चे को इतने वर्षों के बाद देखते हैं तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता है। एक इंटरव्यू की दौरान उन्होने यह भी बताया कि ये काम उनकी ड्यूटी से बिल्कुल् ही अलग है।

रजेश कब से कर रहे हैं यह काम?

साल 2015 में राजेश ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम को ज्वाइन किया और तब से लेकर आज तक वह इस काम को करते आ रहे हैं। सबसे पहले उन्होने नज़फगढ के एक शेल्टर से एक 12 साल के बच्चे को उसके परिवार वाले से मिलाया था, वह बच्चा मुज़फ्फरपुर बिहार के रहने वाला था। उन्होंने बताया कि वह बच्चा न तो बोल सकते था और ना ही सुन सकता था। ऐसे में क़ाफी मसक्कत् के बाद वह उसके परिजनों से मिला सके थे।

राजेश को जब भी कोई बच्चा ऐसी स्थिति में मिलता है तो सबसे पहले बच्चे से पूछ-ताछ करने के बाद वह उसके परिजनों से पहले उसके गाँव के सरपंच या पुलिस वालों से बात करने की कोशिश करते है और यह पता लगाते हैं कि उनके गाँव से बच्चा चोरी या गुम तो नहीं हुआ है? मामला पूरी तरह से जॉच पड़ताल करने के बाद ही बच्चा को परिजनो को सौपते है।

वो कहते है कि कई स्थिति में बच्चा को परिजनो से मिलाना बहुत ही मुश्किल होता है, क्योंकि कुछ बच्चे इतने छोटे होते है कि वह बोल या समझ नहीं पाते, या फिर कई बच्चे ऐसे-ऐसे जगहों के होते है जैसे:-तमिलनाडु, कर्नाटका इत्यादि की उनकी भाषाओं को समझना, या उनसे कुछ पूछ पाना बहुत ही मुश्किल होता है।

बहुत कम लोग होते हैं जो जिनकी सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी होती है, लेकिन राजेश बहुत ही निष्ठा से अपने इस कार्य को अंजाम देते है और ऐसे बच्चे की ज़िन्दगी को बर्बाद होने से बचाते हैं।