कैसे बना डाली रूस के लिए बनाए गए जूतों से 1250 करोड़ की कंपनी, Woodland की सफलता की कहानी

Success Story of Woodland: भारत समेत दुनिया के ज्यादातर देशों में Woodland जूतों का एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय ब्रांड है, जिसके जूते हाई क्वालिटी और मजबूती के लिए जाने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि Woodland की स्थापना करने वाले व्यक्ति एक भारतीय थे, जिन्होंने महज 3 दुकानें खोलकर करोड़ों के व्यापार की शुरुआत की थी।

Avtar Singh Woodland

अवतार सिंह ने रखी वुडलैंड की नींव (Success Story of Woodland)

भारत में भले ही आज Woodland को प्रसिद्ध ब्रांड माना जाता है, लेकिन 1990 के दशक में इस ब्रांड को कोई भी नहीं जानता था। उस वक्त भारतीय बाजारों में बाटा और करोना के जूतों का बोलबाला होता था, जिसके बाद वुडलैंड की एंट्री ने इन दोनों ब्रांड को कड़ी चुनौती देने का काम किया और अपना व्यापार बढ़ाता चला गया। इसे भी पढ़ें – जानिए कैसे साड़ी के शोरूम में काम करने वाला वर्कर बन गया 44 करोड़ रुपए की कम्पनी का मालिक

कनाडा के क्यूबेक शहर में रहने वाले अवतार सिंह (Avtar Singh Woodland) ने साल एरो क्लब में 1980 Woodland की स्थापना की थी, जो Woodland की पहली पेरेंट कंपनी थी। अवतार सिंह मूल रूप से भारतीय हैं और उन दिनों वह एरो क्लब के चेयरमैन हुआ करते थे। एक दिन अवतार सिंह की नजर एक रफ और टफ जूते पर पड़ी, जिसे खासतौर से रूस के ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।

उस जूते को मोटे बफ लेदर को सिलकर तैयार किया गया था, जबकि उसे बनाने के लिए हार्ड रबड़ का भी इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा जूते के लेस भी लेदर के बने हुए थे, जिसकी वजह से उस जूते को आसानी से लंबे समय तक चलाया जा सकता था।

ऐसे में अवतार सिंह ने Woodland की स्थापना करने के बाद उसी रफ और टफ जूते को बाज़ार में बेचने का फैसला किया, जिसके बाद उन्होंने उन जूतों पर वुडलैंड का लेबल लगाया और उन्हें रूस में निर्यात करना शुरू कर दिया। इस तरह रूस में वुडलैंड के उस मजबूत जूते को काफी ज्यादा पसंद किया जाने लगा था, जिसकी वजह से देखते ही देखते यह ब्रांड भारत तक पहुँच गया। इसे भी पढ़ें – 4 भाईयों ने 50 हजार का कर्ज लेकर शुरू की थी Hero Cycles, फिर ऐसे बनी दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल कंपनी

भारत में Woodland की शुरुआत

भारत जैसे देश में Woodland के मजबूत जूते को बेचना आसान नहीं था, क्योंकि यहाँ मौसम और माहौल इतना मुश्किल नहीं होता है। ऊपर से उस दौर में बाज़ार में अन्य ब्रांड के जूते काफी ज्यादा बिकते थे, लेकिन इसके बावजूद भी अवतार सिंह ने रिस्क लेकर बारत में वुडलैंड की सेल करने का फैसला किया।

इसके लिए अवतार सिंह ने दिल्ली के कुछ छोटे रिटेलर्स से संपर्क किया और उन्हें कमीशन के आधार पर वुडलैंड के जूते बेचने का प्रस्ताव दिया, जिसे दुकानदारों ने स्वीकार लिया था। इसके बाद अवतार सिंह ने भारत में 2 अलग-अलग तरह के जूते लॉन्च किए, जिसमें जी-0092 यानी 1992 और जी यानी जेंट्स शूज शामिल थे। ऐसे में भारतीय ग्राहकों को जी-0092 जूते काफी पसंद आए और लोगों ने उन्हें खरीदना शुरू कर दिया। इसे भी पढ़ें – एक वकील ने रखी थी गोदरेज कंपनी की नींव, अंग्रेजों से भिड़कर शुरू किया था मेड इन इंडिया ब्रांड

इन जूतों के रंग भी काफी अतरंगी थी, जिसमें खाकी, ब्लैक, ऑलिव और कैमल कलर शामिल था। भारत में इन अतरंगी रंग और डिजाइन वाले टफ जूतों को काफी ज्यादा पसंद किया गया, जो लंबे समय तक टिकते थे और आसानी से फटते नहीं थे। इसकी वजह से वुडलैंड को भारतीय बाज़ार में अपने पैर फैलाने का मौका मिल गया, जिसके बाद हर किसी की जुबान पर वुडलैंड का नाम रहने लगा।

1,250 करोड़ रुपए का कारोबार

Woodland पर लोगों का विश्वास इतना ज्यादा बढ़ गया कि वर्तमान में वुडलैंड के जूतों का प्रोडक्शन नोएडा में किया जाता है, जबकि जूतों को बनाने के लिए पंजाब के जालंधर से जमड़ा मंगवाया जाता है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में वुडलैंड की 8 फैक्ट्रियाँ मौजूद हैं, जहाँ डिमांड का 70 प्रतिशत माल तैयार किया जाता है।

आज Woodland के दुनिया भर में लगभग 350 एक्सक्यूसिव शोरूम मौजूद हैं, जबकि 5 हजार से ज्यादा मल्टी ब्रांड आउटलेट्स भी हैं। इस वक्त वुडलैंड सालाना 1, 250 करोड़ रुपए व्यापार करती है, जो अपने आप में इतनी बड़ी रकम है कि उसकी मदद से जूतों के दूसरे ब्रांड्स की कमाई पर काफी असर पड़ता है। इसे भी पढ़ें – पढ़ने के लिए बेचना पड़ा घर, ठुकराई थी 4 करोड़ की नौकरी, फिर खड़ी कर दी 1.1 अरब डॉलर की कंपनी