अध्यापक का पेशा छोड़ शुरू किया मधुमक्खी पालन का काम, आज 35 से 40 लाख रुपए का टर्नओवर

Subash Kamboj Bee Keeping – आज देश में मधुमक्खी पालन का काम तेजी से उभरता जा रहा है। क्योंकि मधुमक्खी के शहद की मांग आज तेजी से बढ़ रही है। इसकी वज़ह यह है कि आज लोग मधुमक्खी के शहद के प्रति जागरूक हो रहे हैं। वह जान रहे हैं कि मधुमक्खी का शहद हमारी दैनिक दिनचर्या में कितना उपयोगी सिद्ध होता है।

आज की हमारी ये ख़बर भी मधुमक्खी पालन (Bee Keeping) करने वाले एक ऐसे ही किसान से जुड़ी हुई है। उन्होंने अध्यापक का पेशा छोड़ दो दशक पहले मधुमक्खी पालन का काम शुरू किया था। आज आपको जानकर हैरानी होगी कि उस किसान की तारीफ प्रधानमंत्री मोदी तक को अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में करनी पड़ी। आइए मिलवाते हैं आपको उस किसान से।

सुभाष कांबोज (Subash Kamboj)

इनका नाम सुभाष कांबोज (Subash kamboj) है। इनकी उम्र 53 साल है। ये फिलहाल हरियाणा के यमुनानगर जिले के हाफिजपुर गाँव में रहते हैं। वर्तमान में ये किसान लगभग दस एकड़ में मधुमक्खी पालन का काम करते हैं। इस काम को करते हुए इन्हें करीब 25 साल का लंबा वक़्त बीत चुका है।

कैसे हुई थ शुरुआत

सुभाष कांबोज बताते हैं कि मधुमक्खी पालन के इस काम से पहले वह टीचर थे। वह पास के ही एक स्कूल में बच्चों को पढ़ाने जाया करते थे। यदि हम उनकी शिक्षा की बात करें तो वह ग्रेजुएट हैं। साथ ही उन्होंने डीपीएड का डिप्लोमा भी पास किया हुआ है। साल 1996 के दौरान वह समय आया जब उन्होंने शिक्षक से मधुमक्खी पालक बनने का निर्णय किया। इसके बाद उन्होंने खादी ग्रामोद्योग से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण हासिल किया और फिर उतर आए इस काम के मैदान में।

महज 6 बक्से से की थी शुरुआत

भले ही आज सुभाष कांबोज एक बड़े किसान बन चुके है। लेकिन उन्होंने इस काम में शुरुआत महज़ 6 बक्से से ही की थी। धीरे-धीरे जब उन्हें मुनाफा होता दिखाई दिया तो आगे बक्से बढ़ाते चले गए। आज इन बक्सों की संख्या लगभग दो हज़ार के करीब पहुँच चुकी है। अच्छी बात ये है कि उनके यह सभी बॉक्स भी पारंपरिक 6 बक्सों से ही विकसित किए हैं। साथ ही उनका ये काम भी आज कई राज्यों में विस्तार ले चुका है। क्योंकि वह फूलों की खेती और मौसम के अनुसार इन बक्सों की जगह में लगातार बदलाव करते रहते हैं।

प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं तारीफ

सुभाष कांबोज आज ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। क्योंकि उन्होंने अपनी खेती की तारीफ अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM modi) के मुंह से भी सुन ली है। जी हाँ, प्रधानमंत्री ने हाल ही में अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उनका ज़िक्र किया था। प्रधानमंत्री ने सुभाष कांबोज की खेती का ज़िक्र करते हुए बताया कि किस तरह आज देश के किसान मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में भी बेहतर आमदनी कर रहे हैं।

विदेशों में भी भेजते हैं शहद

इन बॉक्स को मौसम और फूलों की उपलब्धता के आधार पर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर आदि में स्थानांतरित किया जाता है। आपको बता दें कि उनका शहद भी आज देश के तमाम राज्यों तक बिकने के लिए भेजा जाता है। इन राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल आदि राज्य शामिल हैं। इसके अलावा वह सरसों के फूलों से भी मधुमक्खी का शहद तैयार करने का काम करते हैं। जिसकी ज्यादातर मांग दूसरे देशों में रहती है। इस शहद को वह अमेरिका समेत तमाम दूसरे देशों में भेजते हैं। जिससे उनकी अच्छी कमाई होती है।

साथ में करते हैं पारंपरिक खेती

सुभाष कांबोज ऐसा नहीं है कि आज केवल मधुमक्खी पालन के काम तक सीमित हैं, वह ख़ुद की खेती भी करते हैं। जिसमें पारंपरिक फसलों के अलावा फूलों की खेती भी शामिल है। वह समयानुसार अपने खेतों में भी इन बक्सों को रखकर शहद इकट्ठा करते हैं। आपको बता दें कि सुभाष कांबोज आज शहद के साथ 6 अन्य उत्पाद भी तैयार करते हैं। जिसमें मोम, कोम्ब हनी, बी प्रोपोलिस, बी पोलन, वीवनम व रायल जैली आदि शामिल है। इसकी बिक्री से भी उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त होती है।

लाखों में होता है टर्न ओवर

सुभाष कांबोज बताते हैं कि इस काम से उन्हें 35 से 40 लाख का सालाना टर्नओवर मिलता है। जिसमें में करीब 15 लाख रुपए उनक मुनाफा शामिल होता है। आज वह इस काम को करने के साथ लोगों को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग भी देते हैं। अब तक वह करीब एक हज़ार किसानों को इस काम की ट्रेनिंग दे चुके हैं। जो कि अब मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में अपना काम कर रहे हैं।

सुभाष कांबोज (Subash Kamboj) आज जिस तरह से ख़ुद भी मधुमक्खी पालन (Beekeeping) करते हैं और दूसरों भी इस काम को करने का प्रशिक्षण देते हैं। वह काबिले तारीफ है। उनके इस काम को ‘Awesome GYAN‘ दिल से सलाम करता है।