पानी की बाल्टी और मछलियाँ लेकर शुरू की गार्डनिंग, एक्वापोनिक्स टेक्निक से उगाते हैं 63 प्रकार की सब्जियाँ

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आजकल खेती में दिन प्रतिदिन नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं और एक्वापोनिक्स टेक्निक (Aquaponics Techniques) से खेती और भी सरल हो गई है। आज हम पुणे में रहने वाले एक ऐसे ही व्यक्ति समीर की सूझबूझ और लगन की कहानी सुना रहे हैं, जिन्होंने एक्वापोनिक्स तकनीक (Aquaponics Techniques) से गार्डनिंग करके ख़ूब सारी सब्जियाँ उगाई हैं…

पुणे निवासी 38 वर्षीय समीर (Sameer) IT प्रोफेशनल हैं। उन्हें बुक्स पढ़ना बहुत पसंद है, बुक्स पढ़ते समय एक बार समीर को एक्वापोनिक्स टेक्निक (Aquaponics Techniques) के बारे में पता चला तो उन पर इसका बहुत प्रभाव पड़ा, फिर उन्होंने इसी टेक्निक का प्रयोग कर पौधे उगाना शुरू किया और अब वह अपने ख़ुद के उगाए हुए फल और सब्जियाँ ही खाते हैं।

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बाल्टी में पौधे उगाकर किया एक्सपेरिमेंट, जो सफल रहा

दरअसल एक्वापोनिक्स टेक्निक (Aquaponics Techniques) दो विधियों का संयोजन है। इस विधि का पहला भाग Aquaculture (जलिय कृषि) होता है और दूसरा भाग हीड्रोपोनिक्स (Hydroponics) होता है जिसमें मिट्टी के बिना भी पौधे उगाए जा सकते हैं।

समीर ने इस टेक्निक से प्रभावित होकर कुछ एक्सपेरिमेंट करने का सोचा, जिसके लिए उन्होंने अपनी टेरिस पर रखी दो बाल्टियाँ उपयोग की। सबसे पहले उन्होंने एक पानी का पंप लगाया उसके बाद थोड़ी मछलियाँ और पाइप खरीदे। फिर वह नर्सरी में गए और वहाँ से पुदीने का पौधा लाकर लगाया। करीब 8 दिन बाद पुदीने का पौधा बढ़ने लगा और उसमें नई-नई पत्तियाँ आने लगी। इस प्रकार से समीर का यह एक्सपेरिमेंट कामयाब हुआ और फिर उन्होंने बकेट पोनिक्स की (बाल्टी में एक्वापोनिक्स तकनीक का प्रयोग) से पौधे उगाना शुरू कर दिया।

Aquaponics Techniques से अब उगाते हैं 63 तरह की सब्जियाँ

इस तकनीक से समीर ने जो पुदीना उगाया, वह बिल्कुल फ्रेश और खुशबूदार था। वे बताते हैं कि उन्होंने बुक्स में पढ़ा था कि मछलियों का अपशिष्ट, पानी में अमोनिया और नाइट्रेट के अच्छे स्रोत का काम करता है, जिससे पौधों का अच्छा विकास होता है। फिर उन्होंने जो एक्सपेरिमेंट किया, उसे यह बात साबित भी हो गई।

सबसे पहले उन्होंने पुदीना उगाने से गार्डनिंग की शुरुआत की थी पर अब वे 63 तरह की विभिन्न सब्जियाँ उगाते हैं जिनमें पालक, टमाटर, खीरा, मक्का, स्टीविया, कद्दू और भी कई प्रकार की सब्जियाँ हैं। हालांकि जब उन्होंने गार्डनिंग शुरू की तो वह पहले बाल्टियों का इस्तेमाल किया करते थे पर धीरे-धीरे बाद में उन्होंने ड्रम का उपयोग करना शुरू कर दिया था। उन्होंने 1 वर्ष तक मछलियों के विभिन्न आवासों का एक्सपेरिमेंट किया और उसके बाद उनको “फाइबर रिईफोर्स्ड प्लास्टिक (FRP)” से निर्मित डबल डेकर टब का डिज़ाइन मिल गया, इस टब की खासियत यह है कि ये धूप में रखने पर भी करीब 25 वर्षों तक चलता है।

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अलग-अलग मछलियों से किए प्रयोग

समीर की पौधे उगाने की यह तकनीक कुछ इस तरह काम करती थी कि वह ऊपर के टब में सब्जियाँ उगाते और नीचे वाले टब में मछलियाँ रखते हैं। नीचे के टब पंप की सहायता से पानी ऊपर पौधों में जाता है, फिर रेक्सिक्लिंग के लिए उसे नीचे के टब में भेजा जाता है। इस तरह समीर नए-नए एक्सपेरिमेंट करते गए और नई चीजें सीखते गए। उन्होंने इस टेक्निक के साथ कई सारे प्रयोग किए जैसे कि उन्होंने बहुत-सी विभिन्न प्रकार की मछलियों जैसे कैटफ़िश, गपि, रोहू, कतला और कवई इत्यादि के साथ एक्सपेरिमेंट किए। हालांकि कवई मछली काफ़ी महँगी होती है, पर उससे उत्पादन भी ज़्यादा होता है।

अपने लिए बिना केमिकल की सब्जियाँ व फल ख़ुद उगाते हैं

समीर का कहना है कि सभी व्यक्तियों को अपने खाने के लिए सब्जियाँ और फल घर पर ही उगा लेनी चाहिए। फिर यदि उपयोग करने के बाद भी सब्जियाँ और फल बच जाते हैं तो आप उसे बेचकर पैसे भी कमा सकते हैं। अगर हम खाना बर्बाद होने से रोकेंगे तो केमिकल वाली सब्जियाँ हमें नहीं खानी पड़ेगी और हम स्वस्थ रहेंगे।

वे अपना एक किस्सा बताते हुए कहते हैं कि एक बार उनके गार्डन को एक बच्चा देखने आया था। फिर उसने पालक के पत्ते को तोड़ कर खा लिया। जिसे खाकर उसने कहा कि यह पालक तो बिल्कुल भी कड़वी नहीं है। तब उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं अपने पौधों में बिल्कुल भी केमिकल का प्रयोग नहीं करता हूँ।

ऑनलाइन वीडियो देखकर और बुक्स पढ़कर सीखा

समीर ने किसी की सहायता लिए बिना अकेले ही इन सारे प्रयोगों और सारे कार्यों को अंजाम दिया, वे सफल भी हुए पर इसके लिए उन्हें कई वर्षों तक मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने अपने पौधों के लिए पानी और पोषक तत्वों की मात्रा में संतुलन बनाए रखने के तरीके भी खोजे। वह ख़ुद ही अपने पौधों की देखरेख करते हैं। उन्होंने ऑनलाइन वीडियो देखकर और अलग-अलग बुक्स पढ़कर पौधों की इस तकनीक के बारे में बहुत-सी चीजें सीखी, जिनका वे समय-समय पर उपयोग करते हैं।

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ऑनलाइन वर्कशॉप भी चलाते हैं समीर

अब उन्होंने एक सब्सक्रिप्शन मॉडल स्टार्ट किया है, जिसकी सहायता से अब दूसरे लोग भी उनकी ऑर्गेनिक वेजिटेबल्स खरीद सकते हैं। उन्होंने छह व्यक्तियों के साथ मिलकर यह मॉडल शुरू किया। समीर को 250 ग्राम चेरी या दूसरी सब्जियों के लिए हर महीने लोग ₹600 दिया करते हैं।

समीर को अपना यह व्यवसाय बढ़ाने के लिए लोगों से जुड़ने की आवश्यकता थी, जिसके लिए उन्होंने हर रोज़ की ऑनलाइन वर्कशॉप शुरू कर दी है। इतना ही नहीं, अब तो वे रोजाना प्रातः 9: 00 बजे से अपने इंस्टाग्राम अकाउंट द्वारा लोगों के गार्डनिंग से सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर भी दिया करते हैं। कई जगहों से बहुत से लोग जैसे कि मुम्बई और रत्नागिरी गार्डनर्स और भी कई स्थानों से लोग उनसे प्रश्न पूछते हैं।

समीर का व्यापारिक मॉडल अब तैयार हो गया है तथा मुम्बई के एक व्यक्ति ने अपनी टेरिस पर ऐसा मॉडल बनवाने की इच्छा भी जाहिर की है, लेकिन समीर कहते हैं कि ऐसे शहरी किसानों और मार्केट रेडी करने के लिए उनको अभी और भी निवेशकों की आवश्यकता पड़ेगी। समीर के प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं। यदि आप भी उनसे किसी भी प्रकार की जानकारी लेना चाहते हैं तो उनके इंस्टाग्राम एकाउंट प्लकइट (pluckit) पर जुड़िए।

Source – thebetterindia.com

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