केले के बेकार पड़े कचरे से बना दिये कई तरह के प्रोडक्ट साथ में गाँव की 450 महिलाओं को दे रहे हैं रोज़गार

क्या आपने कभी सोचा है कि बेकार पड़े कूड़े से भी व्यापार करके मुनाफा कमाया जा सकता है, अगर नहीं… तो रवि प्रसाद की कहानी जानने के बाद आप भी हैरान रह जाएंगे। रवि प्रसाद एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने केले के बेकार पड़े कूड़े से व्यापार की शुरुआत की और आज लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं।

आखिर रवि प्रसाद (Ravi Prasad) ने ऐसा कौन सा व्यापार शुरू किया, जिसके दम पर वह न सिर्फ आत्मनिर्भर बने, बल्कि सैकड़ों लोगों को रोज़गार भी मुहैया करवाया।

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रवि प्रसाद (Ravi Prasad)… फर्श से अर्श तक का सफर

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर (Kushinagar) ज़िले में हरिहरपुर नामक एक छोटा सा गांव है, जहां रवि प्रसाद अपने परिवार के साथ रहते हैं। इस गांव में मुख्य रूप से केले की खेती की जाती है, जहां तकरीबन 27 हजार हेक्टेयर की जमीन पर केले के पेड़ मौजूद हैं। ऐसे में केले पक जाने के बाद उन्हें बाजार में बेच दिया जाता था, जबकि उसके पेड़ों को काटकर फेंक दिया जाता था ताकि नई फसल उगाई जा सके।

रवि प्रसाद ने केले के सूखे पेड़ों से ही अपने व्यापार की शुरुआत की और उनके तने से फाइबर निकालने लगे, जिसके जरिए कालीन, चप्पल, टोपी, बैग और डोरमैट जैसी घरेलू साज सज्जा की चीजों को तैयार किया जाता है। रवि प्रसाद ने केले के बेकार तने से फाइबर निकालने से लेकर उससे विभिन्न वस्तुओं को तैयार करने का काम ख़ुद ब ख़ुद किया है।

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नहीं मिली नौकरी तो शुरू किया व्यापार

रवि प्रसाद ने गोरखपुर के दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बीए की डिग्री हासिल की थी, जिसके बाद वह नौकरी की तलाश में दिल्ली आ गए। दिल्ली में नौकरी की तलाश करने के दौरान एक रवि प्रसाद अपने दोस्तों के साथ प्रगति मैदान में लगी एक प्रदर्शनी को देखने गए, जहाँ तमिलनाडु से आए एक व्यापारी ने केले के फाइबर (BANANA FIBER) से तैयार बैग की स्टॉल लगाया था।

रवि प्रसाद को उस व्यक्ति द्वारा तैयार बैग बहुत ही पसंद आए, इसके साथ ही उन्हें केले से नया बिसनेस शुरू करने को लेकर बेहतरीन आइडिया भी मिल गया। रवि प्रसाद को ख़्याल आया कि उनके ज़िले और गाँव में केले की खेती बहुत बड़ी संख्या में की जाती है, लेकिन वहाँ के किसान BANANA FIBER के बारे में कोई जानकारी नहीं रखते हैं।

यहाँ तक की फ़सल तैयार होने के बाद वह केले के पेड़ों को काटकर फेंक देते हैं और नए पेड़ लगाना शुरू कर देते हैं, ताकि काटे गए पेड़ों से BANANA FIBER निकाल कर कई तरह की चीजों का निर्माण किया जा सकता है। बस रवि प्रसाद ने बिना कोई देरी करते हुए अपना बैग उठाया और BANANA FIBER को तैयार करने का गुण सीखने के लिए तमिलनाडु के उसी व्यापारी के पास पहुँच गए।

उस व्यापारी को रवि प्रसाद का जज़्बा काफ़ी पसंद आया, क्योंकि आमतौर पर युवा आरामदायक नौकरी करना पसंद करते हैं। जबकि रवि उनके पास जाकर BANANA FIBER तैयार करने की तकनीक सीखना चाहता था, ताकि वह रोज़गार प्राप्त कर सके। इसके बाद उस व्यापारी ने रवि प्रसाद को कोयंबटूर आने का न्यौता दिया, जहाँ रवि ने BANANA FIBER के इस्तेमाल से चीजों को तैयार करने की कला सीखी।

कोयंबटूर से तकरीबन 160 किलोमीटर दूर एक गाँव मौजूद है, जहाँ BANANA FIBER के जरिए विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाते हैं और युवाओं को उन्हें बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है। रवि प्रसाद को वहाँ की स्थानीय भाषा नहीं आती थी, जिसकी वज़ह से उन्हें शुरुआत में काम सीखने और समझने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

लेकिन बाद में रवि प्रसाद ने देखा देखी करके चीजों का निर्माण करना शुरू कर दिया, जिसकी वज़ह से उन्हें बिना भाषा की समझ के भी BANANA FIBER तैयार होने वाले प्रोडक्ट्स बनाने में कामयाबी मिल गई। रवि प्रसाद ने लगभग 1 महीनें तक उस गाँव में ट्रेनिंग ली और सीधा अपने गाँव पहुँच गए, जिसके बाद उन्होंने बिजनेस में हाथ आजमाने का फ़ैसला किया।

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हुनर से शुरू किया सफलता का सफर

रवि प्रसाद के पास अपना व्यापार शुरू करने के लिए पर्याप्त धन नहीं था, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि वह BANANA FIBER का व्यापार शुरू करके ही रहेंगे। इसलिए रवि प्रसाद कुशीनगर के ज़िला उद्योग केंद्र पहुँचे और प्रधानमंत्री रोज़गार योजना की जानकारी इकट्ठा की।

प्रधानमंत्री रोज़गार सर्जन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत रवि प्रसाद को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से पांच लाख रुपए का लोन मिल गया था, इसके बाद रवि प्रसाद ने साल 2018 में BANANA FIBER से तैयार हैंडीक्राफ्ट बिजनेस की नींव रखी। बिजनेस की शुरुआत करते ही रवि प्रसाद को गाँव से ही बहुत ज़्यादा मात्रा में केले के पेड़ मिल गए थे।

उन्होंने केले की खेती करने वाले किसानों से बातचीत की और पेड़ों को काटने के बाद फेंकने के बजाय उन्हें देने का सौदा किया। इसके बाद जब गाँव में केले के फ़सल कटी, तो किसानों ने रवि प्रसाद को वह पेड़ दे दिए। जिसके बाद रवि प्रसाद ने मशीन के जरिए उन पेड़ों के तने के दो हिस्से किए और उनसे फाइबर बनाया।

दरअसल केले के पेड़ के तने के जब काटा जाता है, तो उससे बहुत ज़्यादा मात्रा में रस निकलता है। फिर उस रस को छांव में अच्छी तरह से सुखाया जाता है, जिससे बाद में रेशा यानी फाइबर तैयार होता है। इसके साथ ही फाइबर अलग करने के बाद केले के तने को कम्पोस्ट खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल किया जाता है।

रवि प्रसाद ने बैंक से मिले लोन से फाइबर निकलने वाली मशीन खरीद थी, ताकि उस रेशे से विभिन्न चीजों का निर्माण किया जा सके। धागे से समान दिखने वाले BANANA FIBER के इस्तेमाल से टोपी, बैग, कारपेट और घर की सजावट के लिए यूज होने वाली कई चीजें तैयार की जाती हैं।

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450 से भी ज़्यादा महिलाओं को रोज़गार

रवि प्रसाद BANANA FIBER का बिजनेस शुरू करके न सिर्फ़ ख़ुद आत्मनिर्भर बने, बल्कि उन्होंने अपने गाँव की 450 से भी ज़्यादा महिलाओं को रोज़गार देने का काम किया है। साल 2018 के अंत में ही राज्य सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजान (ODOP) शुरू की थी, जिसके जरिए रवि प्रसाद ने अपनी कला को दुनिया के सामने रखा।

इस योजना के जरिए कुशीनगर ज़िले में BANANA FIBER के रोज़गार को काफ़ी बढ़ावा मिला और साथ ही रवि प्रसाद के बिजनेस में बढ़ोतरी होने में मदद मिल गई। राज्य सरकार द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में रवि प्रसाद को अपना स्टॉल लगाने का मौका मिला था, जिसके जरिए उन्हें बिजनेस को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।

आज रवि प्रसाद पूरे साल में दो बार राज्य में और दो बार राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले मेलों में BANANA FIBER का स्टॉल लगाते हैं, जहाँ वह लोगों को केले के तने से तैयार होने वाली चीजों के बारे में जानकारी देते हैं। इस तरह विभिन्न मेलों में स्टॉल लगाने की बदौलत ही उनके बिजनेस के साथ 450 महिलाएँ जुड़ चुकी हैं, जिन्हें BANANA FIBER से तैयार होने वाले उत्पादों को बनाने की ट्रेनिंग की जाती है।

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सरकार की मदद और आत्मनिर्भर बनती महिलाएँ

महिलाएँ ट्रेनिंग में केले के तने से फाइबर निकालने से लेकर रेशे से विभिन्न उत्पाद तैयार करने तक का सारा काम ख़ुद करती हैं, जिससे उन्हें आगे चलकर आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। उन सभी महिलाओं को ट्रेनिंग देने की सारी जिम्मेदारी ODOP योजना के तहत उठाई जाती है, जिसमें महिलाओं को 10 दिन ट्रेनिंग दी जाती है।

राज्य सरकार 10 दिन की इस ट्रेनिंग के लिए महिलाओं को हर दिन 200 रुपए का भुगतान करती है, इसके बाद महिलाओं को ख़ुद का व्यापार करने या फाइबर के जरिए चीजों का उत्पादन करने की आजादी होती है। इसके साथ ही उन महिलाओं को ट्रेनिंग के लिए चरखा, कैंची और रंगने के लिए ब्रश आदि भी मुहैया करवाया जाता है।

ट्रेनिंग लेने वाली सभी महिलाएँ रवि प्रसाद के साथ 50 से भी ज़्यादा प्रदर्शनियों में हिस्सा ले चुकी हैं, जहाँ वह अन्य लोगों को BANANA FIBER से तैयार होने वाले उत्पादों की जानकारी देती हैं। इन्हीं प्रदर्शनियों की वज़ह से कुशीनगर ज़िले का नाम BANANA FIBER उत्पादों के लिए देश भर में प्रसिद्ध हो चुका है, जिसका श्रेय रवि प्रसाद को दिया जाता है।

रवि प्रसाद को सिर्फ़ राज्य से ही नहीं बल्कि पूरे भारत वर्ष से हैंडमेड उत्पादों का ऑर्डर मिलता है, जिसे वह ट्रेनिंग ले चुकी महिलाओं की मदद से पूरा करते हैं। इसके साथ ही अब कुशीनगर के अलावा दूसरे ज़िलों में भी केले की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है, ताकि केले के फाइबर (BANANA FIBER) के क्षेत्र में रोज़गार की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके।

रवि प्रसाद (Ravi Prasad) के एक आइडिया की वज़ह से कुशीनगर समेत उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में रोज़गार के नए अवसर तलाश करने में मदद मिल रही है, जिसमें महिलाओं समेत युवा भी बढ़ चढ़ के हिस्सा ले रहे हैं। रवि प्रसाद की कहानी सच में बहुत ही प्रेरणादायक है, जिसके जरिए आप भी अपने व्यापार की शुरुआत के बारे में सोच सकते हैं।