टूटी झोपड़ी.. दिन में पढ़ाई, रात में चौकीदारी, IIM रांची के इस प्रोफेसर का संघर्ष जान आपकी आंखें भी नम हो जाएंगी

हमारी ज़िन्दगी में बहुत से रंग होते है लेकिन इन रंगों को ऐसे ही हासिल नहीं किया जा सकता है। इन रंगों को पाने के लिए हमें दिन रात एक करके मेहनत करनी पड़ती है। विपरीत हालात और लोगों की बातों से निराश होने की बजाय जो लोग निरंतर मेहनत करते रहते हैं। उनका ही नाम एक दिन सुनहरे रंगों से लिखा जाता है।

हमारी आज की ये ख़बर भी एक ऐसे ही युवा प्रोफेसर से जुड़ी है। दूसरों की नज़र में भले ही आज ये युवा IIM Ranchi में महज़ एक प्रोफेसर हो, लेकिन जिसने भी इस युवा प्रोफेसर की ज़िन्दगी में झांक कर देखा है, उसे कुछ ना कुछ सीखने को ज़रूर मिला है। तो आइए जानते हैं कौन है ये युवा प्रोफेसर।

रंजीत रामचंद्रन (Ranjit Ramachandran)

इस युवा प्रोफेसर का नाम रंजीत रामचंद्रन (Ranjit Ramachandran) है। इनकी उम्र 28 साल है। सोशल मीडिया पर आज मानो ये ट्रेडिंग गुरु बन चुके हैं। क्योंकि हाल ही में इन्होंने सोशल मीडिया पर अपने बचपन की उस झोपड़ी का फोटो शेयर किया है जिसमें वह कभी पैदा हुए थे। झोपड़ी से निकलकर आज एक प्रोफेसर बनने वाले रंजीत की फोटो रातों रात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसमें उन्होंने अपने जीवन के पूरे सफ़र के बारे में विस्तार से बताया है। इनके सफ़र को पढ़ते ही लोग इनके दीवाने हो गए। इनकी उस पोस्ट पर अबतक हजारों लाइक, कमेंट और हजारों लोगों ने शेयर तक कर दिया है।

परिवार ग़रीबी में करता था गुजारा

ये अपनी पोस्ट में बताते हैं कि इनके पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह इन्हें बेहतर तरीके से पढ़ा लिखा सकें। क्योंकि इनके पिता जी दर्जी का काम करते थे और इनकी माताजी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मजदूरी का काम करती थी। इससे होने वाली आय से इनका घर बड़ी मुश्किल से चलता था। ऐसे में इनकी पढ़ाई लिखाई करवाने का तो सवाल ही नहीं उठता।

जब छूटने वाली थी पढ़ाई

स्कूल की पढ़ाई के बाद ये आगे पढ़ना तो चाहते थे, लेकिन परिवार के हालातों को देखकर इन्हें भी ऐसा लगा कि अब पढ़ाई छोड़ कोई काम करना पड़ेगा। जिससे परिवार की मदद हो सके। लेकिन तभी इन्होंने समाचार पत्र में छपा एक विज्ञापन देखा जिसमें बताया गया था कि बीएसएनएल (BSNL) कंपनी में एक चौकीदार की ज़रूरत है। इन्होंने झट से उसके लिए आवेदन कर दिया। भाग्य ने साथ दिया और इन्हें वह नौकरी मिल गई।

चौकीदार की नौकरी ने दिया साहस

वैसे तो एक चौकीदार की मामूली-सी नौकरी कुछ नहीं होती। लेकिन बुरे वक़्त में यही नौकरी रामचंद्रन के लिए मानो भाग्य विधाता साबित हुई थी। उन्हें जैसे ही BSNL में चौकीदार की नौकरी मिल गई तो उन्होंने आगे पढ़ने का पूरा इरादा बना लिया। जिसके बाद आगे उन्होंने राजापुरम में सेंट पायस एक्स कॉलेज में दाखिला लिया। यहाँ उन्होंने बीए (अर्थशास्त्र) का कोर्स करने का फ़ैसला किया।

दिन में पढ़ाई, रात में की चौकीदारी

रंजीत रामचंद्रन का आगे का रास्ता बेहद कठिन था। जहाँ आज के दौर में बच्चे कॉलेज में जाकर मौज मस्ती करते हैं, तो वहीं रामचंद्रन को कॉलेज के दिनों में घर आकर चौकीदारी करनी पड़ती थी। वह दिन में कॉलेज में जाकर पढ़ाई करते थे और रात में घर से BSNL में चौकीदारी का काम करने चले जाते थे। चौकीदारी के इस काम के साथ उन्होंने पूरे पांच साल तक अपनी पढ़ाई जारी रखी। जिसमें शुरुआती दिनों में उन्हें महज़ 3500 रुपए वेतन मिलता था, तो वहीं अंतिम साल में उनका वेतन 8,000 रुपए तक कर दिया गया था।

IIT मद्रास में भी कठिन रहा सफर

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह IIT मद्रास में पीएचडी करने चले गए। यहाँ भी मुश्किलों ने मनो उनका पीछा नहीं छोड़ा था। क्योंकि वह केवल मलयालम भाषा बोलना जानते थे। ऐसे में उन्होंने एक बार तो इस पीएचडी को बीच में ही छोड़ने का निर्णय कर लिया था। लेकिन तभी उनके मार्गदर्शक डॉ सुभाष (Dr. Subash) ने उन्हें ऐसा करने से रोका। उनकी बात मानकर रामचंद्रन ने पीएचडी छोड़ने का अपना फ़ैसला वापस ले लिया।

आपको जानकर ख़ुशी होगी कि पिछले साल ही रामचंद्रन को डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा जा चुका है। इसके बाद बेंगलुरु के क्राइस्ट चर्च कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी मिली। पिछले दो महीने से रंजीत IIM रांची में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं।

केरल के वित्त मंत्री ने भी की है इनकी तारीफ

उनकी लिखी पोस्ट को केरल के वित्त मंत्री ‘टी एम थॉमस इसाक’ ने भी शेयर किया है। शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है कि आज रंजीत रामचंद्रन हम सभी के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने लिखा कि जिस पल भी रामचंद्रन को लगा कि वह हार गए हैं, उन्होंने हमेशा नए संकल्प के साथ फिर से लड़ाई शुरू कर दी। वह कहते हैं कि हमारे देश की वीर भूमि पर ऐसे ना जानें कितने ही उदाहरण हैं जिन्होंने विपरीत हालातों के बावजूद सफलता हासिल की है। इसलिए कभी किसी को भी निराश होकर हार नहीं माननी चाहिए।

रंजीत रामचंद्रन (Ranjit Ramachandran) से लेनी चाहिए सीख

रंजीत रामचंद्रन (Ranjit Ramachandran) कहते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी ये पोस्ट इतनी ज़्यादा वायरल हो जाएगी। उन्होंने तो इसमें सिर्फ़ अपने जीवन की दुख भरी कहानी ही बयाँ की थी। लेकिन वह चाहते हैं कि उनकी इस कहानी को आगे जो भी पढ़े इससे हमेशा प्रेरणा ले। वह चाहते हैं कि हर कोई सपना देखे और उन सपनों को पाने के संघर्ष करें। उनका मानना है कि संघर्ष की राह पर चलकर ही सफलता हासिल की जा सकती है। रामचंद्रन के इस संघर्ष को ‘Awesome Gyan’ सलाम करता है। साथ ही उन्हें शुभकामनाएँ देता है।