TCS की जॉब छोड़कर इस शख्स ने शुरू की खेती, नई तकनीक से बढ़ा दी दूसरे किसानों की भी आमदनी

Rakesh kumar Mahanti – दोस्तों, अपना करियर बनाने के बारे में तो हर कोई सोचता है, सभी चाहते हैं कि बस किसी तरह से पढ़ लिख कर अच्छी जॉब मिल जाए और सेटल हो जाएं, लेकिन बहुत कम ऐसे व्यक्ति होते हैं जो लीक से हटकर सोचते हैं और कुछ ऐसा करना चाहते हैं जिससे अपने साथ दूसरों की भी उन्नति हो, आर्थिक-सामाजिक स्तर में बदलाव आए। आज हम ऐसे ही एक शख्स की बात कर रहे हैं, जिन्होंने अपने साथ कई किसानों की तकदीर बदल डाली।

पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर (Jamshedpur) के जिला मुख्यालय से लगभग 25 Km. दूर पटमदा (Patamda) में लोग जब एक पढ़े-लिखे, आकर्षक पर्सनेलिटी वाले युवक को ट्रैक्टर चलाते हुए देखते हैं, तो हैरान रह जाते हैं। इस युवक का नाम है राकेश कुमार महंती (Rakesh kumar Mahanti), जिन्होंने खेती में अपना करियर बनाने के लिए TCS यानि Tata Consultancy Services जैसी बढिया जॉब छोड़ दी और साथ ही दूसरे किसानों स्थिति भी बदली।

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राकेश कुमार महंती (Rakesh kumar Mahanti)

राकेश ने वर्ष 2012 में बीआईटी बेंगलुरु से बीटेक पूरा किया था। फिर उनका TCS कैम्पस सलेक्शन हो गया। उन्होंने 4 साल तक TCS में जॉब भी की, पर फिर उन्हें महसूस हुआ कि ये जॉब उनके लिए नहीं है, वहाँ उनका मन नहीं लगता था। इसके बाद राकेश ने फैसला किया कि वह अपने गांव लौट कर खेती को ही अपना कार्य बनाएंगे और साथ ही दूसरे किसानों की स्थिति बदलने की भी कोशिश करेंगे। ये सोचकर वे झारखंड के जमशेदपुर जिले में स्थित अपने पटमदा गांव वापस आ गए।

TCS की जॉब छोड़कर जब राकेश अपने गांव वापस आए तो उन्हें लगा कि पहले उन्हें खेती के बेसिक समझ लेने चाहिए, इसलिए प्रोफेशनल तरीके से खेती की ट्रेनिंग लेने के लिए उन्होंने जमशेदपुर में स्थित एक्सएलआरआइ स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (XLRI) से उद्यमिता विकास का कोर्स पूरा किया। इसी बीच उन्होंने किसानों तथा कृषि विभाग के पदाधिकारियों से कॉन्टेक्ट करना भी जारी रखा।

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Model Farming से बढ़ाई किसानों की आमदनी

राकेश ने कहा कि वे पारंपरिक खेती को एक उद्योग के रूप में परिवर्तित करना चाहते थे। हालांकि शुरुआत में तो उन्हें यह सब करना काफी मुश्किल लगा। फिर से जुड़ी परेशानियों को हल करने के लिए वे सारे देश भर में घूम घूमकर का सफल किसानों से मिले और उनसे बातचीत की, साथ ही उनके प्रयोगों को देखा और समझा। फिर अंततः उन्हें लगा कि किसानों की इन समस्याओं को स्थानीय स्तर पर ही हल किया जा सकता है।

राकेश ने पहले अपने साथ काम करने वाले 5 किसानों की एक टीम बनाकर उनकी मदद से भूमि के छोटे से टुकड़े पर मॉडल फार्मिंग (Model Farming) की शुरूआत की। जिसके अंतर्गत उन्होंने सब्जी के साथ ही मकई-बाजरा इत्यादि भी उगाना शुरू कर दिया। उनकी यह कोशिश कामयाब रही और उन्होंने अपने साथ करीब 85 किसानों की आमदनी बढ़ाई । अब तो गांव के सभी लोग उन्हें फॉलो कर रहे हैं। उनका कहना है कि दूसरे लोग तभी आपका अनुसरण करेंगे, जब आप स्वयं कुछ बेहतर काम करके दिखाएंगे।

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200 से ज्यादा किसान जुड़े Brook N Bees से

राकेश ने वर्ष 2017 में सामाजिक उद्यम Brook N Bees स्टार्ट किया। इसके द्वारा से किसान भाई ऑर्गेनिक फार्मिंग (Organic Farming) करने के गुर सीखते व समझते हैं। कृषि के लिए आवश्यक चीज़ें जैसे बीज, खाद, आधुनिक उपकरण इत्यादि की जानकारी भी लेते हैं। इतना ही नहीं, Brook N Bees से जुड़े किसान आपस में खेती की जमीन, संसाधन, ज्ञान, उपकरण, श्रम व मशीनरी आदि भी साझा किया करते हैं।

जिसके बदले में उनको बिक्री बाद मुनाफे से किराया भी प्राप्त हो जाता है। इन खेतों में जो किसान मजदूर काम करते हैं उन्हें भी 5 से 6 हजार रुपये प्रति माह आय प्राप्त हो जाती है। वर्तमान समय में सारे देश से लगभग 200 किसान राकेश से जुड़े हैं और निरंतर उनसे नई चीज़ें सीखते हैं।

Kisan Haat से बाज़ार की चिंता हुई दूर

इस प्रकार से खेती से जुड़ी पूरी तैयारीयां होने के बाद राकेश ने उत्पाद की बिक्री के बारे में सोचा। जिसके लिए उन्होंने किसान हाट (Kisan Haat) की शुरू किया। फिर तो शहर के थोक ग्राहक भी उन्हीं के गांव में आकर ताजा सब्जीयां ले जाने लगे। वे स्वयं भी शहर की हाउसिंग कालोनी सोसाइटी में अपना किसान हाट स्टॉल लगाते थे। इस प्रकार से सभी को खेत से तोड़ी ताजा सब्जियां पसन्द आने लगी और उनकी आदत बन गयी।

राकेश ने बताया कि पहले तो मार्केट में बासी सब्जियां ही मिला करती थीं, अतः लोगों को मजबूरन वही खरीदनी पड़ती थी। परन्तु, जब से लोगों ने उनकी ताज़ी सब्जीयों का स्वाद चखा, फिर उन्होंने मार्केट से सब्जी खरीदना बंद कर दिया और उनकी फ्रेश सब्जी खरीदने लगे थे। फ्रेश सब्जीयों में प्राकृतिक खुशबू के साथ ही भरपूर पोषक तत्व भी होते हैं। अब तो उनके कस्टमर्स को वही सब्जियां पसन्द आती हैं। अब वे सब्जियों के अलावा फलों के पौधे तथा औषधीय पौधे भी लगा रहे हैं, जिससे प्रत्येक सीजन में किसानों को रोजगार मिल सके।

किसानों और युवाओं के लिए बन गए हैं रोल मॉडल

राकेश द्वारा किसानों के लिए किए गए प्रयासों के लिए पूर्वी सिंहभूम जिला के पूर्व कृषि पदाधिकारी मिथलेश कालिंदी ने भी तारीफ की थी। वे कहते हैं कि राकेश स्थानीय कृषकों के लिए रोल मॉडल बन गए हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करके उसका उपयोग उन्होंने कृषि में किया, जिससे अन्य किसानों व युवाओं पर काफी प्रभाव पड़ा है। इतना ही नहीं, दूसरा काम करने वाले युवा भी राकेश के जैसे ही नई तकनीकों से खेती करना चाहते हैं, जो कि अपने आप में एक अच्छी बात है।

वे हाईटेक ऑर्गेनिक फार्मिंग (Hi-Tech Organic Farming) कर रहे हैं तथा साथ ही अपने तरीके से अपने प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग भी कर रहे हैं। राकेश को फॉलो करते हुए कई लोगों ने महंगे दामों पर बिकने वाली फसलों की खेती करना भी स्टार्ट कर दिया है। बता दें कि राकेश एक किसान स्कूल भी चलाया करते हैं, वहां पर किसानों को जैविक खेती के लिए व साथ ही आधुनिक तकनीकों से खेती के लिए मुफ्त ट्रेनिंग भी प्रदान की जाती है।

अब तो जो किसान एकीकृत खेती करना चाहते हैं, उनको एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास जाने की सलाह देते हैं। राकेश हाईटेक एग्रीकल्चर के अलावा प्रोडक्ट मार्केटिंग भी करते हैं। राकेश (Rakesh kumar Mahanti) जैसे उद्यमी युवाओं की हम दिल से प्रशंसा करते हैं, जो अपने साथ दूसरों की भी तरक्की के लिए काम किया करते हैं।