2013 में प्रमोद मित्तल ने बेटी की शादी में ख़र्च किए थे 254 करोड़, अब हुए दिवालिया!

कहते हैं कि लक्ष्मी बहुत चंचल होती है, अभी आपके पास है तो कभी भी निकल सकती है। इसलिए इसे संभालने की कला इंसान को आनी चाहिए। ऐसा ही हुआ है स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल के छोटे भाई प्रमोद मित्तल के साथ जो की ब्रिटेन में दिवालिया हो गए हैं। और ख़ास बात तो यह है कि उन्होंने ही इस बात की जानकारी दी है कि उनके ऊपर 254 करोड़ पाउंड का कर्ज़ है।

अभी उनका ख़र्चा उनकी पत्नी ही चला रही है। अभी प्रमोद मित्तल ब्रिटेन के सबसे बड़े दिवालिया हो गए हैं। उन्हे इस साल लंदन की इनसॉल्वेंसी और कंपनीज कोर्ट ने दिवालिया घोषित कर दिया है।

फ़िलहाल 64 वर्षीय प्रमोद के उपर 17 करोड़ पाउंड का कर्ज़ शामिल हैं, जो उन्होंने अपने 94 वर्षीय पिता से लिया है। प्रमोद ने इसके अलावा भी अपनी पत्नी संगीता से 11 लाख पाउंड, अपने बेटे दिव्येश से 24 लाख पाउंड और अपने एक रिश्तेदार अमित लोहिया से 11 लाख पाउंड भी कर्ज़ लिए हैं।

सिर्फ 1.10 लाख पाउंड की संपत्ति बची है

एक रिपोर्ट में उन्होंने ही बताया है कि उनके पास अभी सिर्फ़ 1.10 लाख पाउंड की संपत्ति बची है और वर्तमान में उनकी कहीं से किसी तरह की इनकम भी नहीं है। लेकिन वह इस बात की उम्मीद जता रहे है कि वह इस मुश्किल घड़ी से जल्द ही निकाल जाएंगे। उन्होंने अगर सबसे ज़्यादा कर्ज़ लिया है तो वह है ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड की कंपनी ‘डायरेक्ट इनवेस्टमेंट लिमिटेड’ जिससे उन्होंने करीब 100 करोड़ पाउंड कर्ज़ लिया है।

बेटी की शादी में ख़र्च किए थे 254 करोड़

एक समय ऐसा भी था जब 2013 में प्रमोद मित्तल ने अपनी बेटी सृष्टि की शादी एक इनवेस्टमेंट बैंकर गुलराज बहल के साथ की थी और इस शादी में उन्होंने करीब 254 करोड़ रुपये ख़र्च किए थे। यह रक़म उस रक़म से भी बहुत ज़्यादा थी जो उनके भाई लक्ष्मी मित्तल ने अपनी बेटी वनिशा कि शादी में ख़र्च किए थे।

फिलहाल उनकी कोई आमदनी नहीं है

मित्तल ने कोर्ट में कहा कि:-अब मेरी कोई आमदनी नहीं रह गई है। मेरी पत्नी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। हमारे बैंक खाते भी अलग-अलग हैं। पत्नी की आमदनी के बारे में भी उतनी जानकारी नहीं है। मेरा हर महीने का ख़र्च लगभग 2 हज़ार से 3 हज़ार पाउंड का है, जो उनकी पत्नी और उनके परिवार के दूसरे सदस्य चला रहे हैं और मेरे दिवालिया प्रक्रिया का कानूनी ख़र्च भी कोई और ही उठा रहा है।

इस तरह अब देखना यह है कि कब उनकी आर्थिक स्थिति सही होती है और वह कब मुश्किलों से निकलकर बाहर आते हैं।