शिक्षक की नौकरी छोड़ बेकार पड़े चावल के भूसे को ‘काला सोना’ बना दिया, होती है लाखो की कमाई

कई बार जानकारियों के अभाव में हम उन चीजों को भी फेंक दिया करते हैं जिससे हम लाखों की कमाई कर सकते हैं। बिभु साहू (Bibhu Shahu) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्हें अब तक इस बात की जानकारी नहीं थी कि चावल से निकले हुए भूसे से वह अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। लेकिन जानकारी होने के बाद अब वह हर साल इस भूसे से “काला सोना” बना कर लगभग 20 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। आइए जानते हैं कैसे?

बिभु साहू (Bibhu Shahu) जो उड़ीसा के कालाहांडी के रहने वाले हैं, जिनकी उम्र 40 वर्ष है। पिछले कई सालों से विभु साहू चावल मिल का व्यवसाय कर रहे हैं। साल 2007 में उन्होंने अपने शिक्षक की नौकरी छोड़ दी और अपना व्यवसाय शुरू किया लेकिन 2014 में उन्होंने चावल मिल का व्यवसाय शुरू किया।

व्यवसाय करने के दौरान उन्होंने देखा कि बहुत भारी मात्रा में चावल से भूसे निकल रहे हैं। जगह की कमी के कारण बिभू भूसे को स्टोर भी नहीं कर सकते थे और अगर इस भूसे को वह जलाते तब पर्यावरण को क्षति पहुँचती। इसलिए उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह इस भूसे का क्या करें? उसी दौरान उन्हें स्टील कंपनियों में भूसे को निर्यात करने के बारे में पता चला। तब उन्होंने स्टील कंपनियों को चावल से निकले हुए भूसें को निर्यात करना शुरू किया। जिससे उन्हें लाखों की कमाई होने लगी।

जानकारी के लिए आपको बता दें की स्टील कंपनियाँ चावल के भूसे का उपयोग एक थर्मल इंसुलेटर के रूप में करती है। इसलिए उसे ज़्यादा मात्रा में भूसे चाहिए होते हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान बिभु साहू ने बताया कि अब वह चावल से निकले हुए भूसे को पूरे भारत समेत विदेशों तक भी पहुँचा रहे हैं, जिसमें मिस्र, यूक्रेन और ताइवान जैसे देश शामिल हैं। अब बिभू अपने इस नए व्यवसाय से हर साल लगभग 20 लाख रुपए से भी ज़्यादा की आमदनी कर रहे हैं।

इस तरह विभु के लिए चावल के वह भूसे काला सोना के समान है। उन्होंने कहा कि इससे मेरी आमदनी में बढ़ोतरी के साथ-साथ ज़िन्दगी भी बदल गई है।