इस शख्स ने MNC की नौकरी छोड़ी और गाँव के तालाब में मोती उगा कर कमा लिए लाखों रुपए

Pearl Farming – जब सही प्लांनिग और आत्मविश्वास के साथ कोई काम शुरू किया जाए तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। अगर आप मेहनत करने से घबराते नहीं हैं और अपने मन में कुछ कर दिखाने का जज़्बा लिए पूरी लगन से अपने काम में लगे रहते हैं, तो एक दिन ऐसा भी आता है, जब आप दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणा का सबब बन जाते हैं।

ऐसे ही एक शख़्स हैं, नितिल भारद्वाज (Nitil Bharadwaaj) , जो बिहार के एक गाँव के रहने वाले हैं। उनकी दिल्ली में एक MNC में जॉब अच्छी चल रही थी, परन्तु पिछले वर्ष ही उन्होंने अपनी जॉब छोड़ कर गाँव वापस आने का निश्चय कर लिया। दरअसल नितिल यूं ही गाँव वापस नहीं आए थे बल्कि सोच समझकर और पूरी प्लानिंग करके आए थे कि उन्हें आगे क्या करना है। उन्होंने अपने गाँव के तालाब में मोती की खेती (Pearl Farming) करने का फ़ैसला किया था और उसी के अनुसार उन्होंने सारा प्लान बनाया था। गाँव आकर उन्होंने अपने इस काम की शुरुआत कर दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुए प्रेरित

हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हमेशा देश को सम्बोधित करते हुए आत्मनिर्भर बनने की बात कहते हैं। उनकी इसी बात से प्रेरित होकर 28 वर्षीय नितिल ने भी नौकरी करने के बजाए अपना कुछ काम करके आत्मनिर्भर बनने का निश्चय किया। फिर उन्होंने मोती की खेती पर रिसर्च करना शुरू किया और इस काम का प्रशिक्षण भी लिया। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने इस कार्य की शुरुआत की।

काम में मदद के लिए 6 माइग्रेंट कारीगर रखे

जब उन्होंने मोती की खेती (Pearl Farming) का काम शुरू किया, तब उन्हें कुछ मजदूरों की भी आवश्यकता थी तो ऐसे में उन्होंने 6 माइग्रेंट मज़दूर काम में मदद करने के लिए रख लिए। असल में यह मज़दूर लॉकडाउन में काम बंद होने की वज़ह से अपने गाँव वापस आए थे। नितिल ने उनके साथ मिलकर 1 एकड़ की भूमि में अपना यह व्यवसाय शुरू किया।

अब कमाते हैं 30-35 लाख रुपए, बत्तख पालन भी करते हैं

नितिल का यह व्यवसाय (Pearl Farming) अब अच्छा चल रहा है, करीब 8 से 10 महीने काम करने पर उनकी 30-35 लाख रुपये तक कि कमाई हो रही है। मोती की खेती के साथ ही उन्होंने कई तरह के सह व्यवसाय भी शुरू कर दिया हैं, जिनसे उनकी अतिरिक्त कमाई होती है। उन्होंने बत्तख पालन का काम शुरू कर दिया है और पॉल्ट्री फॉर्म भी खोल लिया हैं। इसके साथ ही वे मछली पालन भी करते हैं। इस प्रकार से नितिल ने अपने परिश्रम से ना सिर्फ़ अपने आर्थिक स्तर को सुधारा है बल्कि अब उनसे अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

नितिल भारद्वाज (Nitil Bharadwaaj) का मानना है कि अपना ख़ुद का व्यवसाय करना ही सबसे अच्छा रहता है। हाँ पर, आपको पूरी इमानदारी और बेहतर प्लानिंग करके काम करना होगा। अब नितिल बिहार के बाघा जिले के युवा व्यक्तियों के लिए एक रोल मॉडल बन गए हैं, उनसे प्रेरणा लेकर कई युवा आत्मनिर्भर बनने को प्रयासरत हैं। (Pearl Farming)