टिकट कलेक्टर से लेकर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कप्तान बनने तक का महेंद्र सिंह धोनी का अद्भुत सफर

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Mahendra Singh Dhoni

15 अगस्त 2020 की तारीख उन तमाम क्रिकेट फैंस के लिए एक निराशाजनक खबर लेकर आई, जो महेंद्र सिंह धोनी के दीवाने हैं। भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तान एमएस धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा 15 अगस्त को करके क्रिकेट मैदान को अलविदा कह दिया, हालांकि वह आईपीएल खेलते रहेंगे। महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट के अब तक के सबसे सफलतम कप्तान रहे हैं।

जानते हैं उनकी जीवन यात्रा के महत्वपूर्ण तथ्य-

  1. महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को रांची में हुआ था। उनके पिता श्री पान सिंह मेकॉन कंपनी में जूनियर मैनेजर के पद पर कार्य करते थे और उनकी मां श्रीमती देवकी देवी एक गृहिणी है।
  2. धोनी के पिता मूल रूप से अल्मोड़ा उत्तराखंड के निवासी हैं। नौकरी के उद्देश्य से वह रांची आकर बसे और वही रहने लगे।
  3. महेंद्र सिंह धोनी के एक बड़े भाई नरेंद्र सिंह धोनी और एक बड़ी बहन जयंती गुप्ता है। उनके भाई राजनीति में सक्रिय हैं और बहन अंग्रेजी शिक्षिका हैं।
  4. धोनी ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत रांची के श्यामली में स्थित डीएवी जवाहर विद्या मंदिर स्कूल से की थी। धोनी स्कूल में फुटबॉल खेलने के शौकीन थे, उन्हें अपनी फुटबॉल स्कूल टीम का गोलकीपर बनने का भी मौका मिला था। साथ ही साथ धोनी बैडमिंटन में भी रुचि रखते थे।
  5. क्रिकेट में उनकी रूचि दसवीं कक्षा से शुरू हुई जब उनके फुटबॉल कोच ने उन्हें स्थानीय क्लब की क्रिकेट टीम में विकेटकीपर के तौर पर भेजा।उनके अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें कमांडो क्रिकेट क्लब टीम में विकेटकीपर का स्थान मिला। 1997-98 में उनका चयन वीनो माकंड अंडर-16 चैंपियनशिप टीम में भी हुआ।
  6. महेंद्र सिंह धोनी ने बारहवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी।
  7. 1998 में उन्हें केंद्रीय कोयला फील्ड लिमिटेड टीम में खेलने के लिए चुना गया। यहां उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। इसके बाद ही उन्हें प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेलने का मौका मिला।
  8. 1999-2000 में उन्हें रणजी ट्रॉफी में खेलने का अवसर मिला। यहां उन्होंने बिहार की तरफ से खेलते हुए नाबाद 68 रन बनाए। अगले सीजन में 5 मैचों में 283 रन बनाए थे लेकिन उनकी टीम ट्रॉफी जीतने में सफल नहीं रही।
  9. एम एस धोनी का चयन दिलीप ट्रॉफी के लिए हुआ, लेकिन समय पर सूचना ना मिल पाने के कारण वह अगरतला नहीं पहुंच पाए जहां दिलीप ट्रॉफी का मैच खेला जाना था।
  10. जब उनका चयन ईस्ट जोन की तरफ से नहीं हुआ तो उन्होंने क्रिकेट से दूरी बना ली और खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट कलेक्टर की नौकरी कर ली। 2001 से 2003 तक वह टीटीई के रूप में काम करते रहे। इस बीच उन्होंने देवधर ट्रॉफी टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और अच्छा प्रदर्शन किया।
  11. 2003-2004 में उनका जिंबाब्वे और केन्या के दौरे के लिए इंडिया ‘ए’ टीम में चयन हुआ। उन्होंने अपना पहला मैच जिंबाब्वे के खिलाफ विकेटकीपर के तौर पर खेला और मैच के दौरान सात कैच पकड़े। पाकिस्तान ‘ए’ के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने अर्ध शतक बनाया।
  12. उनके बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए उनका चयन 2004-2005 में राष्ट्रीय वनडे टीम में हुआ। उन्होंने अपना पहला मैच बांग्लादेश के खिलाफ 23 दिसंबर, 2005 को खेला था,लेकिन मैच में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे।
  13. अच्छा प्रदर्शन ना होते हुए भी चयनकर्ताओं ने उन्हें दूसरा मौका दिया और इस बार धोनी ने निराश ना करते हुए पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया और 148 रन बनाकर पहले भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज भी बन गए।
  14. महेंद्र सिंह धोनी ने इंडिया-श्रीलंका की द्विपक्षीय श्रृंखला के तीसरे मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए 145 गेंदों में नाबाद 183 रन बनाए और सीरीज के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। अपने जोरदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘मैन ऑफ द सीरीज’ भी चुना गया।
  15. 2005-06 में भारत-पाकिस्तान वनडे सीरीज के 5 मैचों में क्रमशः 68 रन, नाबाद 72 रन, नाबाद 2 रन, नाबाद 77 रन बनाए और 4-1 से सीरीज में जीत हासिल की।अपने जबरदस्त प्रदर्शन की बदौलत महेंद्र सिंह धोनी 20 अप्रैल 2006 को रिकी पोंटिंग को पछाड़ते हुए आईसीसी की वनडे रैंकिंग के शीर्ष पर पहुंच गए।
  16. 2007 में धोनी ने वनडे विश्व कप टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर के कहने पर धोनी को टीम के नेतृत्व की कमान सौंपी गई उनके विश्वास को सही ठहराते हुए इसी साल 2007 में आईसीसी विश्व कप ट्वेंटी-20 टूर्नामेंट में बेहतरीन कप्तानी करते हुए महेंद्र सिंह धोनी ने विश्व कप ट्रॉफी भारतीय टीम के नाम की।
  17. ट्रॉफी जीतने के बाद धोनी को वनडे और टेस्ट मैचों की भी कप्तानी मिली। उनके नेतृत्व में खेले गए 2011 विश्व कप में भारतीय टीम ने इतिहास रचा और विश्व कप अपने नाम किया। 2015 में विश्व कप में भारतीय टीम धोनी के नेतृत्व में सेमीफाइनल तक पहुंची।
  18. धोनी ने अपना पहला टेस्ट मैच 2 दिसंबर 2005 को श्रीलंका के खिलाफ खेला था। 2008 से 2014 तक उन्होंने टेस्ट टीम का नेतृत्व भी किया। उन्हीं के नेतृत्व में 2009 में भारतीय टीम आईसीसी टेस्ट रैंकिंग के प्रथम स्थान पर पहुंची। 2014 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच खेलते हुए उन्होंने 35 रन बनाए और इसी मैच के साथ उन्होंने टेस्ट मैच से संन्यास ले लिया।
  19. टेस्ट मैचों से संन्यास लेने के बाद वह वनडे और ट्वेंटी-20 मैचों में बतौर कप्तान खेलते रहे। जनवरी 2017 में महेंद्र सिंह धोनी ने वनडे कप्तानी से संन्यास लिया और 15 अगस्त 2020 को उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम से संन्यास की घोषणा कर दी।
  20. महेंद्र सिंह धोनी आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते हैं। वह आईपीएल के सबसे महंगे खिलाड़ी हैं। उनके नेतृत्व में तीन बार चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम कर चुकी है।
  21. महेंद्र सिंह धोनी का विवाह 4 जुलाई, 2010 को साक्षी के साथ हुआ था और 6 फरवरी, 2015 को धोनी एक बच्ची के पिता भी बन गए। धोनी की बेटी का नाम जीवा धोनी है। धोनी की पत्नी साक्षी उनकी बचपन की दोस्त हैं।
  22. महेंद्र सिंह धोनी को साल 2011 में सेना का लेफ्टिनेंट कर्नल भी नियुक्त किया गया है। 2019 में बतौर सैन्य अधिकारी धोनी की ट्रेनिंग की काफी चर्चा हुई थी।
  23. साल 2007 में एम एस धोनी को भारत सरकार द्वारा राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से नवाजा गया है और 2 अप्रैल,2018 को तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है।
  24. महेंद्र सिंह धोनी रांची में एक होटल चलाते हैं, जिसका नाम उन्होंने ‘माही निवास’ रखा है। इसके अलावा उन्होंने रीति ग्रुप के साथ मिलकर कपड़े के एक ब्रांड की शुरुआत की है, जिसका नाम ‘सेवन’ है।
  25. धोनी को महंगी बाइक और कार का भी बहुत शौक है उनके पास ऑडी Q7, एसयूवी हमर H2 जैसी कार है। इसके अलावा कॉन्फेडरेट हेलकैट X132 और कावासाकी निंजा H2 समेत कई महंगी सुपर बाइक भी हैं।
  26. साल 2011 में क्रिकेट विश्व कप जीतने के बाद फिल्म निर्देशक नीरज पांडे ने महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर बायोपिक बनाई, जिसमें धोनी का किरदार सुशांत सिंह राजपूत ने निभाया था यह फिल्म 30 सितंबर, 2016 को रिलीज हुई।

अपने चाहने वालों के बीच माही के नाम से प्रसिद्ध धोनी के संन्यास के साथ क्रिकेट के एक युग का अंत हो गया। हम उन्हें उनकी आगामी पारी के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं।

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