IIT से इंजीनियरिंग के बाद सरकारी नौकरी छोड़ उड़ीसा के किसानों की ज़िंदगी बदल रही है बिहार की पूजा

आज के समय में यह कहना गलत होगा कि खेती सिर्फ़ पुरुष ही करते हैं बल्कि अब महिलाओं की भी इस क्षेत्र में बराबर की भागीदारी है। वह भी बढ़-चढ़कर अब खेती कर रही हैं। बिहार की रहने वाली पूजा भारती (Puja Bharti) भी आईआईटी (IIT) करने के बाद अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर खेती करने लगी।

पूजा भारती (Puja Bharti) जो मूल रूप से बिहार, नालंदा के कंचनपुर गाँव की रहने वाली हैं। आज इनकी पहचान एक महिला किसान के रूप में हो चुकी है। वैसे इन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा गाँव के सरकारी स्कूल से पूरी की। सरकारी स्कूल में शिक्षा की कमी होने के कारण इनकी अंग्रेज़ी बहुत ज्यादा कमजोर हो गई, जिसकी वज़ह से इन्हें आगे की पढ़ाई में बहुत परेशानी हुई।

अंग्रेजी को लेकर बहुत ज्यादा परेशानी हुई

पूजा ने एक चीज पर गौर किया कि अगर लड़कियाँ अपनी आगे की पढ़ाई में व्यस्त ना रहे तो अक्सर उनकी शादी कर दी जाती है। यही बात पूजा की बड़ी बहनों के साथ भी हुई। इस बात से चिंतित पूजा आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखने का फैसला लिया और आईआईटी (IIT) में दाखिला के लिए तैयारी शुरू कर दी।

आगे पूजा ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा को पास भी कर लिया और उसके बाद उनका दाखिला इंजीनियरिंग कॉलेज में हो गया। लेकिन इंजीनियरिंग के क्लास के दौरान उन्हें अंग्रेज़ी को लेकर बहुत ज़्यादा परेशानी हुई उन्हें कुछ समझ में नहीं आता था। लेकिन इससे उन्होंने डर कर पीछे हटने के बजाय मेहनत करना शुरू किया और धीरे-धीरे उन्हें पढ़ाई समझ आने लगी।

विदेश भी जाने का अवसर प्राप्त हुआ

पूजा पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी काफ़ी अच्छी रही है। पढ़ाई के दौरान उन्होंने बास्केटबॉल में अपने कॉलेज का प्रतिनिधित्व भी किया। पूजा को इंजीनियरिंग करने के बाद इंटर्नशिप के लिए अमेरिका के वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी में जाने का अवसर भी मिला, जहाँ वह अपना पीएचडी भी पूरा कर सकती थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। आगे पूजा ने नौकरी करने का फ़ैसला लिया। उन्होंने गेल में सरकारी नौकरी तो पा ली, लेकिन इसके बावजूद भी उनका मन नौकरी में ना लग कर गाँव से और खेतों से जुड़ा रहा।

क्योंकि उनका मानना था कि इतनी अच्छी नौकरी करने के बाद भी लोगों के चेहरे पर वह ख़ुशी नहीं है जो ख़ुशी होनी चाहिए। तब उन्होंने कभी-कभी अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर पूरे देश भर के गाँव में घूम घूमकर रिसर्च करना शुरू किया। रिसर्च करने के बाद उन्होंने कृषि विशेषज्ञ दीपक सचदे से मिलकर खेती से जुड़ी हुई बहुत सारी जानकारियों को हासिल किया।

जब अपनी सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला लिया

आखिरकार पूजा ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला लिया। पूजा के इस फैसले को लेकर उनके घर वालों ने बहुत ज़्यादा विरोध किया और कहा कि एक न एक दिन उन्हें अपने इस फैसले पर ज़रूर पछताना पड़ेगा। लेकिन पूजा अपने फैसले पर अडिग थी। इस तरह उन्होंने अपने गाँव आकर खेती की शुरुआत की। लेकिन पूजा जब भी खेती करने जाती आसपास के लोग उन्हें बहुत ज़्यादा टोका करते थे। इसलिए उन्होंने खेती के जगह को बदलने का निश्चय किया। उसके बाद उन्होंने 2015 में अपने एक बिजनेस पार्टनर मनीष कुमार के साथ उड़ीसा के मयूरभंज (Mayurbhanj) जिले में खेती का काम शुरू किया।

Back to Village के नाम से एक प्रोजेक्ट शुरू किया

2016 में उन्होंने बैक टू विलेज (Back to Village) के नाम से एक प्रोजेक्ट भी शुरू किया। अपने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने धीरे-धीरे उड़िया भाषा भी सीख ली। उसके बाद उन्होंने बाक़ी किसानों को भी जैविक खेती के बारे में बताना शुरू किया और उन्हें जागरूक करने का काम किया। किसान भी पूजा की बातों को मानने लगे और जैविक खेती करने लगे। इससे किसानों को काफ़ी फायदा होने लगा।

आज उनके साथ लगभग 500 किसान जुड़ चुके हैं

वर्तमान में पूजा (Puja Bharti) ने ‘उन्नत कृषि केंद्र’ के नाम से मयूरभंज, पूरी और बालेश्वर में भी 10 जैविक फॉर्म सेंटर खोल लिया है। उनके हर सेंटर के साथ लगभग 500 किसान जुड़ चुके हैं और उनके सारे सेंटर्स के साथ कुल 5000 से भी अधिक किसान जुड़कर जैविक खेती कर रहे हैं। इस तरह अगर देखा जाए तो उन्होंने जिस प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, वह कृषि उद्यमी तैयार करने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और एक महिला सशक्तिकरण का भी उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।