जानवरों की मसीहा “गुजरात की फॉरेस्टर रसीला वधेर” बचा चुकी हैं अबतक हज़ारों जानवरों की जान

जी हाँ, कहते हैं कि इंसान आपको धोखा दे सकते हैं, लेकिन जानवर नहीं। जहाँ लोग जंगलों में इतने प्रोटेक्शन के साथ डरते-डरते जाते है, वहीं रसीला वधेर गुजरात की गिर जंगल में ऐसे घूमती हैं जैसे जंगलों का राजा शेर भी नहीं घूमता है जंगल में। कुछ दिन पहले रसीला के बारे में आइएफएस ऑफिसर परवीन कासवान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर करते हुए जानकारी दी. 

उन्होंने कैप्शन में लिखा: 

“मिलिए रसीला वधेर से, वह गुजरात के गिर जंगल में फॉरेस्टर हैं और अब तक वह 1000 से ज़्यादा जानवरों का रेस्क़्यू कर चुकी हैं, जिनमें 300 शेर, 500 तेन्दुए, मगरमच्छ, पायथन और भी कई जानवर शामिल हैं। वह कुओं में से भी इन्हें रेस्क्यू करती हैं। उन्हें जानवरो से क़ाफी लगाव है। उनके इस पोस्ट के बाद वह क़ाफी चर्चा में आई और लोग उनकी बहुत तारीफें भी कर रहें हैं।

क्या काम करती हैं रसीला? 

रसीला कि नियुक्ति 2007 में ही गुजरात में वन विभाग में फ़ारेस्ट गार्ड में हुई थी। 2 साल बाद प्रमोशन होने पर वह रेस्क़्यू अभियानों में शामिल होने लगी और तभी से उनका ये सफ़र शुरू हुआ और अभी तक चल रहा है।

रसीला बताती है कि उन्होंने ये नौकरी सिर्फ़ अपने परिवार को आर्थिक सहायता करने के लिए की, लेकिन धीरे-धीरे उनका स्नेह जानवरों की प्रति भी बढ़ता गया। वह कहती है कि जंगलों में काम करते हुए जानवरों से ज़्यादा डर इंसानो से होता है, जो अक्सर शिकार के लिए या फिर तस्करी के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

रसीला के काम करने का कोई फिक्सड टाइम नहीं है उन्हें किसी भी समय कॉल आने पर उनके रेस्क्यू के लिए जाना पड़ता है। वह हमेशा अपनी टीम के साथ पैदल या बाइक से जंगलों में पेट्रोलिंग करती रहती हैं। उनके अब तक के इस साफ़र में अब तक एक भी जानवर की जान नहीं गई है। उनके इस काम में घरवाले भी पूरा सपोर्ट करते हैं।

रसीला का मानना है कि अगर आप जानवरों से प्यार करेंगे तो हमेशा आपको प्यार ही मिलेगा। क्योंकि जानवर आपपर तब तक हमला नहीं करते जबतक उन्हें आपसे कोई ख़तरा ना हो।

हमें उनकी इस सोच से प्रेरणा लेनी चाहिए और हमेशा जानवरों की रक्षा करनी चाहिए जो कभी बोल नहीं सकते लेकिन अपनी वफ़ादारी से बहुत कुछ साबित कर सकते हैं।