Career Tips: जानें क्या है Aeronautical Engineering, जो आपके करियर को देगी ऊंची उड़ान

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Aeronautical Engineer kaise bane– क्या आसमान में उड़ते हुए प्लेन को देखने के बाद कभी आपके मन में यह सवाल आया है कि हवाई जहाज कैसे उड़ाया जाता है। इतना ही नहीं कई बच्चे अपने बचपन में पायलट बनने का सपना भी देखते हैं, लेकिन बढ़ती उम्र की उलझन के साथ वह इस बारे में भूल जाते हैं।

लेकिन अगर आप सच में एयरलाइंस से जुड़े क्षेत्र में काम करना चाहते हैं और इस फील्ड में बेहतर करियर बनाने चाहते हैं, तो आपको इसके बारे में पूरा जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए आपको Aeronautical Engineer की समझ होनी चाहिए, उसके बाद आप इस फील्ड में बेहतर करियर बना सकते हैं।

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Image Credit: freepik

Aeronautical Engineering me Career Scope

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग कोर्स (Aeronautical Engineer Course) करने से पहले आपको यह समझना होगा कि आखिर यह फील्ड क्या है और इसमें किस तरह काम किया जाता है। आपको बता दें कि यह फील्ड डिजाइनिंग, निर्माण, विकास, परीक्षण, ऑपरेशस, कमर्शियल व मिलिट्री एयरक्राफ्ट के पुर्जों का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही Aeronautical Engineer में अंतरिक्ष यान, उपग्रहों और मिसाइल के निर्माण और रखरखाव की ट्रेनिंग भी दी जाती है।

इस कोर्स में स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग से सम्बंधित चीजें सिखाई जाती हैं, जिसके जरिए छात्र कर्मशियल और मिलिट्री समेत अन्य प्रकार के एयरक्राफ्ट्स के निर्माण की ट्रेनिंग की जाती है। इसके साथ ही स्टूडेंट्स को डिजाइनिंग, टेस्टिंग और एनालिसिस की विशेष ट्रेनिंग भी दी जाती है।

Aeronautical Engineer kaise bane

Aeronautical Engineering me Career kaise banaye -अगर आप इस कोर्स में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपकी फिजिक्स, कैमेस्ट्री और मैथ्स में अच्छी पकड़ होनी चाहिए। इसके साथ ही आपके पास 12वीं में इन्हीं सब्जेक्स के साथ पास आउट होना भी जरूरी है, जिसके बाद आपको इस कोर्स में एडमिशन मिल सकता है।

भारत में मुख्य रूप से 4 तरह के Aeronautical Engineer कोर्स करवाए जाते हैं, जिसमें से 3 और 4 साल की अवधि वाले पाठयक्रम शामिल होते हैं। इस फील्ड के स्टूडेंट को एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक और ग्रेजुएशन करने के बाद 4 साल की अवधि वाले पोस्टग्रेजुएशन यानी एमई व एमटेक करना होता है।

अगर आप एमई या एमटेक पूरी कर लेते हैं, तो उसके पास आप 2 साल की अवधि वाले पीएचडी डाक्टरेट डिग्री का कोर्स भी कर सकते हैं। हालांकि यह कोर्स करने या न करना पूरी तरह से स्टूडेंट के ऊपर निर्भर करता है, वह चाहे तो इस विकल्प को छोड़ भी सकता है।

Top Indian Aeronautical Engineering Collage

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, आईआईटी मद्रास
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, आईआईटी बॉम्बे
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, आईआईटी खड़गपुर
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, आईआईटी कानपुर
  • मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
  • अन्ना यूनिवर्सिटी
  • पीईसी यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी

Job Option in Aeronautical Engineering

अगर आप भारत के टॉप इंस्टीट्यूट से Aeronautical Engineering course पूरा कर लेते हैं, तो आपको भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और रक्षा मंत्रालय में आसानी से नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही आप राष्ट्रीय एयरोनॉटिकल प्रयोगशाला, नागरिक उड्डयन विभाग और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में भी नौकरी प्राप्त कर सकते हैं।

इन प्रतिष्ठित अनुसंधानों के साथ काम करने पर आपको अच्छा वेतन पैकेज भी मिलता है, इसके अलावा इंजीनियर्स को अमेरिका, फ्रांस, यूके और जर्मनी जैसे देशों में भी नौकरी मिल सकती है। आपको बता दें कि एयरोनॉटिक्स इंजीनियर्स को नासा और एयरबस जैसी कंपनियों में भी शोध केंद्रों में नौकरी मिल सकती है।

Aeronautical Engineer की शुरुआती सैलरी सालाना 20 से 50 लाख रुपए तक हो सकती है, जिसका निश्चय उम्मीदवार के अनुभव, स्किल और पढ़ाई की ऑर्गनाइजेशन के आधार पर किया जाता है। अगर आप बेहतर उम्मीदवार हैं, तो आपको शुरुआत में ही अच्छी सैलरी मिल सकती है। हालांकि इस क्षेत्र में सरकारी संस्थानों इंजीनियर्स को ग्रेड-ए, ग्रेड-बी, जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर रखा जाता है, जिनकी तनख्वाह अलग-अलग होती है और यह उनके काम के आधार पर निर्भर की जाती है।

इन स्किल्स को होना है बेहद जरूरी

Aeronautical Engineering का क्षेत्र चुनने वाले व्यक्ति के पास मैथ्स की अच्छी समझ, डिजाइन की बेहतर समझ, कंप्यूटर नॉलेज और अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स का होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही अभ्यर्थी को प्रेशर में काम करने, मैनुअल टेक्नीकल, नॉर्मल कलर विजन, फिजिकल फिटनेस और स्पेसक्राफ्ट के उपकरणों की समझ होनी चाहिए।

ऐसे में अगर आप Aeronautical Engineering के क्षेत्र का चुनाव करते हैं, तो मेंटल और फिजिकल रूप से परफेक्ट होना चाहिए। हालांकि इस कोर्स को करने के लिए काफी निवेश करना पड़ता है, जिसका रिटर्न लंबे समय बाद मिलता है। इसलिए अगर आप इस क्षेत्र में बेहतर करना चाहते हैं, तो धैर्य के साथ काम करें।

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